भास्कर न्यूज | अमृतसर पटियाला की सेंट्रल जेल में बंद भाई बलवंत सिंह राजोआना ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को पत्र भेजकर कहा है कि पंजाब के सांसदों को पत्र लिखकर संसद में वीर बाल दिवस को नाम बदलने के लिए आवाज उठाने के लिए लिखा है उससे उनके अंदर कई सवाल हैं। भाई राजोआना ने लिखा है कि सिंह साहिब जी, आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या श्री अकाल तख्त साहिब जी की आवाज इतनी कमजोर हो गई है कि पार्लियामेंट और हुक्मरानों तक नहीं पहुंचती। अगर कोई सांसद श्री अकाल तख्त साहिब को चिट्ठी लिखकर किसी काम के लिए मार्गदर्शन मांगता है, तो यह बात समझ में आती है, लेकिन श्री अकाल तख्त साहिब का सांसदों को चिट्ठी लिखकर उनसे साहिबजादों की शहादत से जुड़े मुद्दे पर पार्लियामेंट में आवाज उठाने के लिए कहना, यह श्री अकाल तख्त साहिब की अहमियत को कम करने और उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला काम है। जिन सांसदों को आपने चिट्ठी लिखी है, उनमें 7 कांग्रेस के हैं। भाई राजोआना ने लिखा कि सिंह साहिब जी, यह श्री अकाल तख्त साहिब अकाल पुरख का सिंहासन है। इसकी आवाज दुनिया में गूंजती है, चाहे वह पार्लियामेंट हो या देश के शासक। अपनी मजबूरियों, कमज़ोरियों और निजी फायदों के लिए इस गूंजती आवाज को कमज़ोर और लाचार न बनाएं। अगर केंद्र सरकार का साहिबजादों के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के तौर पर मनाना खालसा पंथ की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। खालसा पंथ को इस नाम पर कोई एतराज नहीं है। अगर देश के हुक्मरान आपके भेजे सुझावों पर विचार नहीं कर रहे हैं, तो आप खालसा पंथ को यह आदेश जारी करें कि खालसा पंथ केंद्र सरकार द्वारा वीर बल दिवस के नाम पर किए जा रहे किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा न लें। इन हुक्मरानों से कोई संबंध न रखा जाए और न ही उन्हें किसी तरह का समर्थन दिया जाए, जब तक कि ये हुक्मरान खालसा पंथ की भावनाओं का सम्मान करते हुए साहिबजादों के शहीदी दिवस का नाम बदलकर वीर बाल दिवस की जगह साहिबजादे शहीदी दिवस न कर दें।


