पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। डोटासरा ने कहा- यह लोग ऑक्सीजन पर कितने दिन चलेंगे। यह सरकार नहीं सर्कस है। तबादले कब करने हैं, कितने दिन खोलने हैं। ये भी सरकार तय नहीं कर पा रही। तबादले 3-3 दिन खिसकते हैं क्या,10 दिन के तबादले होते हैं क्या। उसमें भी शिक्षा विभाग जैसे मेजर डिपार्टमेंट के तबादले नहीं कर पा रहे। डोटासरा आज अपने सीकर आवास पर मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने ट्रांसफर सहित अन्य मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। डोटासरा ने कहा- तबादला सूची आ रही है। कर्मचारी और अधिकारियों में जिस तरह की बेचैनी है वह चिंता का विषय है। पारदर्शिता की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार जो कहती थी कि हम ट्रांसफर पॉलिसी लाएंगे। वह पॉलिसी लाना तो दूर, हमारी सरकार की जो पॉलिसी बनी हुई है उसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं। छोटे-छोटे कर्मचारियों को जिले और संभाग से बाहर कर रहे हैं। कल-परसों ग्राम सेवकों की एक लिस्ट आई है। वह भी नियम विरुद्ध है। एक ग्राम सेवक को पंचायत समिति में एक जगह से दूसरी जगह वहां की प्रशासन स्थापना समिति कर सकती है। जिले के अंदर एक पंचायत समिति से दूसरी पंचायत समिति में जिला परिषद की प्रशासन स्थापना समिति कर सकती है। राज्य सरकार किसी भी ग्राम सेवक का ट्रांसफर नहीं कर सकती। जब तक दोनों पंचायत समिति या जिले से बाहर कर रही है तो दोनों जिला परिषद की NOC नहीं हो। यह लोग कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। एजुकेशन डिपार्टमेंट में कुछ हो नहीं पा रहा है, पंचायतीराज का बेड़ा गर्क करने में पंचायतीराज मंत्री लगे हुए हैं। घूम रहे हैं,RSS की मीटिंगों में जा रहे हैं,कोई प्राइवेट स्कूल वाला बुलाता है तो वहां पर चले जाते हैं। लेकिन सरकारी शिक्षा का और पंचायतीराज का कैसे सुधार हो, कैसे लोगों को लाभ मिले और कैसे समस्याओं का समाधान हो, इस दिशा में उन्हें काम करना चाहिए। अधिकारी और कर्मचारी कांग्रेस या बीजेपी के नहीं होते ग्रामसेवकों की तबादला सूची पर डोटासरा ने कहा कि इन सबको स्टे मिलेंगे,सरकार जो मर्जी आए वह कर ले, इन्हें परेशान किया जा रहा है। लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति में सारे गोविंद सिंह डोटासरा के आदमी है,यह कहना सही नहीं है। एक कर्मचारी अपनी काबिलियत और पढ़ाई से कर्मचारी बनता है। सरकार में जो भी दिशा निर्देश जारी होते हैं, जो भी पॉलिसी होती है उनकी क्रियान्विति करता है। कर्मचारी और अधिकारी कांग्रेस या बीजेपी के नहीं होते हैं। बीजेपी के कुछ समझ में नहीं आ रहा इसीलिए तो मैं बोल रहा हूं यह पर्ची सरकार है,यह सरकार नहीं सर्कस है। डोटासरा ने कहा कि विधानसभा में तो इस बार मुद्दे ही मुद्दे हैं क्योंकि इन्होंने काम तो कुछ किया नहीं। युवाओं को नौकरी देने की बात कर रहे हैं लेकिन नौकरी दे नहीं रहे। संभाग और जिले खत्म कर रहे हैं। महंगाई कम हुई नहीं और किसान परेशान है। आज पेंशन किसी को मिल नहीं रही, बेरोजगार भत्ता मिल नहीं रहा है। मैं कितने मुद्दे गिनाऊं,इतने मुद्दे है कि छठी का दूध याद दिला देंगे। वहीं डोटासरा ने सीकर के नानी बीहड़ का पानी नेशनल हाईवे पर आने की बात पर कहा कि पहले केवल बारिश के दिनों में ही पुरानी हाईवे पर जाता था लेकिन अब 12 महीने ऐसे हालात रहते हैं। लोग घरों से बाहर भी नहीं निकल पाते। जनता में आक्रोश है। इस बार विधानसभा में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे।


