जैसलमेर के पशु हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने शनिवार को एक बकरी के पेट का ऑपरेशन कर उसमें से कांच के कई टुकड़े निकाले। बकरी द्वारा कांच खा जाने की घटना से हर कोई अचंभित हुआ। करीब 1 घंटे चले सफल ऑपरेशन के बाद बकरी की जान बचा ली गई। पशुपालक ने बकरी की जान बचाने वाले डॉक्टरों और उनकी टीम को धन्यवाद दिया। दरअसल स्थानीय बबर मगरा निवासी छगन सिंह की बकरी पिछले 10 दिनों से कुछ भी खा पी नहीं रही थी। परेशान छगन सिंह ने बकरी को शहर स्थित पशु हॉस्पिटल को दिखाया। डॉक्टरों ने बकरी के पेट में गड़बड़ देखते हुए उसका उसका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद बकरी के पेट से भारी मात्रा में कांच के टुकड़े निकाले गए। फिलहाल बकरी खतरे से बाहर है। वहीं पशुपालक डॉक्टरों को धन्यवाद देते नहीं थक रहा है। 10 दिनों से खाना पीना छोड़ा पशुपालक छगन सिंह ने कहा कि मेरी यह बकरी पिछले कुछ दिनों से कांच के टुकड़े, सेरेमिक मैटल के कप व अखाद्य चीज खा रही है। उसके बाद कुछ दिनों से इस बकरी ने खाना पीना छोड़ दिया है। बकरी की जांच करने के बाद बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ वासुदेव गर्ग ने रूमिनाटोमी ऑपरेशन की सलाह दी। 1 घंटे चला ऑपरेशन डॉ वसुदेव गर्ग ने बताया कि बकरी द्वारा कांच के टुकड़े खाए हुए थे और उसने चरना पीना भी बंद कर दिया। ये नुकीले कांच के टुकड़े पेट व हाथों में नुकसान पहुंचा सकते थे। इन्फेक्शन के कारण कभी भी बकरी की मौत हो सकती थी। बकरी को बचाने के लिए ऑपरेशन ही अंतिम उपाय था। पशुपालक से आम सहमति लेने के बाद पशु डॉक्टरों की टीम द्वारा यह 1 घंटे का जटिल ऑपरेशन किया। जिसमें बकरी के पेट से कांच के टुकड़े, कप के टुकड़े व अन्य अखाद्य वस्तुएं निकाली। ये रहे मौजूद पशुपालक छगन सिंह ने पशु चिकित्सालय में कार्यरत डॉ वासुदेव गर्ग, डॉ जोगेंद्र सिंह देवड़ा, डॉ हेतु दान, डॉ ममता चंदेल व अन्य स्टाफ की सराहना की व राज्य सरकार द्वारा निशुल्क सेवाओं की प्रशंसा की। डॉक्टरों की मेहनत ही थी जिससे गरीब पशुपालक की बकरी की जान बच सकी।


