राजस्थान सरकार पर 6.76 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज:छोटे उद्योगों में निवेश 32.44% बढ़ा, लेकिन रोजगार घटे, केंद्रीय सहायता में 36.70% की कमी

राजस्थान पर लगातार कर्ज बढ़ रहा है। सरकार पर सितंबर 2025 तक 6 लाख 76 हजार 513.55 करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका था। पिछले साल सितंबर तक सरकार पर 6 लाख 8 हजार 813.2 करोड़ रुपए का कर्ज था। बजट अनुमानों में मार्च 2026 तक कर्ज का आंकड़ा 7 लाख 26 हजार 384.84 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। वित्त विभाग के अप्रैल से सितंबर तक की सरकार के बजट और आर्थिक हालात पर जारी राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) रिपोर्ट में इसका ब्योरा दिया गया है। एफआरबीएम रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से सितंबर के बीच राज्य सरकार को मिलने वाली केंद्रीय सहायता (यूनियन ग्रांट्स) में पिछले साल की तुलना में 36.70% कमी दर्ज की गई है। अप्रैल से सितंबर के बीच राज्य सरकार को 5883.86 करोड़ रुपए की यूनियन ग्रांट मिली। पिछले साल अप्रैल से सितंबर के बीच 9295. 64 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता मिली थी, इस तरह इस बार 3411.78 करोड़ रुपए कम मिले हैं। राज्य सरकार ने इस साल बजट में केंद्रीय सहायता के रूप में 39193.30 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान जताया था। एमएसएमई में निवेश 32.44% बढ़ा एफआरबीएम रिव्यू के मुताबिक राजस्थान में अप्रैल से सितंबर के बीच एमएसएमई में निवेश 32.44% बढ़ा है, लेकिन इस सैक्टर में रोजगार बढ़ने की जगह घट गए हैं। एमएसएमई में रोजगार 14.48 लाख से घटकर 14.40 पर आ गए, रोजगार में आठ हजार की कमी हुई है। अप्रैल से दिसंबर तक राजस्थान में 2 लाख 70 हजार 251 माइक्रो, स्मॉल और मीडियम स्टेट इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) रजिस्टर्ड थे, जिनमें 7220.15 करोड़ रुपए का निवेश हुआ और इसे 14 लाख 40 हजार 449 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। एमएसएमई यूनिट के रजिस्ट्रेशन में 2.51% का इजाफा हुआ है, 32.44% निवेश बढ़ा है। साल 2024-25 में 2 लाख 63 हजार 891 एमएसएमई यूनिट रजिस्टर्ड थीं और उनमें 5451.61 करोड़ का निवेश था। 14 लाख 48 हजार 571 लोगों को रोजगार मिला हुआ था। पेट्रोलियम से मिलने वाले रेवेन्यू में 28.79% की कमी सरकार को पेट्रोलियम से मिलने वाले रेवेन्यू में पिछले साल की तुलना में 28.79% की कमी दर्ज की गई है। सरकार को अप्रैल से सितंबर तक 1056.53 करोड़ रुपए का पेट्रोलियम से राजस्व मिला था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 1483.71 करोड़ रुपए मिले थे। सरकार का टैक्स रेवेन्यू 10.68% बढ़ा सरकार के टैक्स रेवेन्यू में 10.68% का इजाफा हुआ है, जबकि नोन टैक्स रेवेन्यू में 16.56% की कमी हुई है। सरकार को अप्रैल से सितंबर के 1 लाख 04 हजार 571.46 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला, पिछले साल 2024-25 में इस अवधि तक 98 हजार 787.86 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला था।
सरकार ने बजट में 2025-26 में 2 लाख 94 हजार 536 करोड़ रुपए का कुल रेवेन्यू मिलने का अनुमान जताया है, जिसमें से सितंबर तक 1 लाख 04 हजार 571.46 करोड़ रुपए मिल चुके थे। छह महीने में खर्च किए 1.40 लाख करोड़ इस साल सरकार ने 3 लाख 79 हजार 616.50 करोड रुपए बजट खर्च करने का अनुमान जताया था, जिसमें से सितंबर तक 1 लाख 40 हजार 821.72 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यह बजट अनुमानों का 37.10% है। राजस्व घाटे में 4000 करोड़ की बढ़ोतरी सरकार का राजस्व घाटा बढ़ा है लेकिन राजकोषीय घाटा कम हुआ है। 6 महीने में 24,110 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा हुआ है, जो 2024-25 में 20 हजार 408 करोड रुपए था। इस तरह पिछले साल की तुलना में इस बार राजस्व घाटे में 4000 करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
सितंबर तक 35837.48 करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा हुआ है, हालांकि पिछले साल से यह आंकड़ा कम है। पिछले साल 36354.98 करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा हुआ था। शराब से छह महीने में 7587 करोड़ मिले सरकार को मिलने वाले टैक्स रेवेन्यू में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी लैंड रेवेन्यू से मिलने वाले टैक्स में हुई है। 6 महीने के दौरान सरकार को 552.39 करोड़ रुपए का टैक्स लैंड रेवेन्यू से मिला है। 2024-25 में अप्रैल से सितंबर के बीच 198 करोड़ रुपए का टैक्स लैंड रेवेन्यू से मिला थाा। इस तरह से 178.67 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने इस बार 881.11 करोड़ रुपए लैंड रेवेन्यू से आने का अनुमान जताया है। एंट्री टैक्स और बिजली से मिलने वाली आय घटी एंट्री टैक्स से मिलने वाले रेवेन्यू में 52.57% की कमी दर्ज की है। इलेक्ट्रिसिटी पर टैक्स और ड्यूटी से मिलने वाला रेवेन्यू भी कम हुआ है, इसमें 6.79% की कमी आई है। इलेक्ट्रिसिटी से 1371.54 करोड़ रुपए मिले हैं, जबकि पिछले साल 1471.43 करोड़ रुपए मिले थे। छह महीने में 51,901 करोड़ का टैक्स वसूला टैक्स रेवेन्यू में 7.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सरकार को 6 महीने में टैक्स रेवेन्यू के तौर पर 51901.38 करोड रुपए मिले हैं, जो कि पिछले साल की तुलना में 7.10% ज्यादा है। पिछले साल 48,459.30 करोड़ रुपए मिले थे। सरकार ने इस साल 1,42,743.39 करोड रुपए टैक्स रेवेन्यू से मिलने का अनुमान जताया है।

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