बुरहानपुर जिला अस्पताल ने शनिवार को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत निमाड़ क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल ने निमाड़ के चार जिलों में पहला स्थान प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी गुणवत्ता का प्रमाण दिया है। बुरहानपुर निमाड़ क्षेत्र का एकमात्र जिला अस्पताल है, जो NQAS के राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरा। करीब दो माह पूर्व केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मूल्यांकन टीम ने बुरहानपुर जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस टीम में डॉ. गोपाल एस. कदम, डॉ. प्रीति पुनातर और डॉ. संजीव कुमार त्रिपाठी शामिल थे। तीन दिवसीय दौरे के दौरान टीम ने अस्पताल की ओपीडी, इनडोर सेवाएं, दवाइयों की उपलब्धता, जांच सुविधाएं और स्वच्छता सहित सभी पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर फीडबैक भी लिया, जिसमें अधिकांश प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रहीं। सर्वेक्षण के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी, जिसके आधार पर बुरहानपुर जिला अस्पताल को कुल 87 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। यह निमाड़ क्षेत्र में सर्वाधिक हैं। जिला अस्पताल में जश्न का माहौल
NQAS में चयन की जानकारी सामने आने के बाद शनिवार दोपहर जिला अस्पताल परिसर में उत्साह का माहौल देखा गया। अस्पताल के डॉक्टर्स और कर्मचारियों ने सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोजेश सहित चिकित्सकों का फूलों से स्वागत किया। सिविल सर्जन डॉ. मोजेश ने बताया कि बुरहानपुर जिला अस्पताल ने NQAS के साथ-साथ लक्ष्य और मुस्कान अभियानों में भी क्वालिफाई किया है। उन्होंने कहा कि निमाड़ क्षेत्र में बुरहानपुर पहला जिला अस्पताल है, जिसने NQAS मानकों को पूरा किया है। अस्पताल के अपग्रेडेशन और टीम वर्क के चलते यह सफलता मिली है। विभिन्न राज्यों से आई टीम ने मरीजों से फीडबैक लिया था, जिसके बाद अस्पताल को यह रैंकिंग प्राप्त हुई। NQAS में टॉप आते ही सिविल सर्जन हुए सख्त
NQAS में शीर्ष स्थान मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोजेश ने अस्पताल में अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना प्राथमिकता रहेगी। जो डॉक्टर ओपीडी में समय पर नहीं बैठते, सर्जरी में लापरवाही बरतते या ड्यूटी के समय अनुपस्थित रहते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल चिकित्सकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी, ताकि अस्पताल की गुणवत्ता और सेवाएं निरंतर बेहतर बनी रहें।


