– नर्सिंग ऑफिसर नियमित भर्ती मामला – अनुभव प्रमाण पत्र को सत्यापित कर निदेशालय/सीफू जयपुर नहीं भेजने को कोर्ट ने माना गंभीर, अब 23 जनवरी को होगी सुनवाई नागौर के डीडवाना में सॉल्ट रोड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को राज्य सरकार द्वारा पीपीपी मोड पर दिए जाने के बाद प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से सेवारत रहे संविदा अभ्यर्थियों का कार्य अनुभव का पुर्नसत्यापन करने से इनकार करने के बाद न्यायालय पहुंचे याचिकाकर्ता को कोर्ट ने राहत देते हुए नागौर सीएमएचओ को पुर्नसत्यापन कराने के अंतरिम आदेश दिए, लेकिन एक महीने बाद भी इसकी पालना नहीं की गई। इसे गंभीरता से लेते हुए राजस्थान हाइकोर्ट की एकलपीठ के न्यायाधीश अरुण मोंगा ने सीएमएचओ को आगामी सुनवाई 23 जनवरी को कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने नागौर के डीडवाना निवासी याचीगण मन्नीराम और नरेंद्रसिंह भाटी की ओर से उच्च न्यायालय में पैरवी करते हुए बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, साल्ट रोड़, डीडवाना को पीपीपी मोड पर दिए जाने के बाद याचिकाकर्ताओ को चिकित्सा विभाग द्वारा जरिये संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी नियुक्त किया गया था। इस र सेवाकाल के दौरान पारिश्रमिक का भुगतान प्लेसमेंट एजेंसी की सुविधानुसार नक़द और बैंक खाते में किया जाता रहा और याचीगण लगातार सेवारत रहे हैं। इसी बीच, नर्सिंग ऑफिसर भर्ती के लिए 5 मई 2023 को विज्ञापन निकाला गया। इसके लिए तत्कालीन सीएमएचओ द्वारा निर्धारित प्रारूप में सभी अटेंडेंस, बिल और वाउचर से मिलान कर कार्य अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए थे। अब उसी भर्ती की अस्थायी मेरिट लिस्ट निकाले जाने के बाद निदेशालय ने सभी सेवारत सविंदा अभ्यर्थियों का कार्य अनुभव का पुर्नसत्यापन करवाने के लिए सभी सीएमएचओ को 22 नवंबर 2023 को निर्देश दिए गए, लेकिन नागौर सीएमएचओ ने कार्य अनुभव का पुर्नसत्यापन करने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि याचीगण की नियुक्ति उसके कार्यकाल में नहीं हुई थी। तब, अधिवक्ता ख़िलेरी के माध्यम से रिट याचिकाएं दायर की गई। रिट याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के समय अन्तरिम आदेश 13 दिसंबर 2024 से एक पद रिक्त रखने सहित सीएमएचओ नागौर को याचिकाकर्ता का कार्य अनुभव का सत्यापन कर निदेशालय, जयपुर को भेजे जाने के स्पष्ट आदेश दिए गए, ताकि याचिकाकर्ता को नर्सिंग ऑफिसर पद पर नियुक्ति के लिए कंसीडर किया जा सके। इसके करीब एक माह बीत जाने के बाद भी सीएमएचओ नागौर ने कार्य अनुभव का सत्यापन कर जयपुर नही भेजा। सीएमएचओ नागौर के कार्यालय से याचिकाकर्ता को मौखिक बताया गया कि हाइकोर्ट के आदेश से कुछ नहीं होता है, निदेशालय, स्वास्थ्य भवन, जयपुर से आदेश आने पर ही कार्य अनुभव का सत्यापन कर निदेशालय, जयपुर को भेजा जा सकता है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा न्यायालय को बताया गया कि एक तरफ एक माह बीत जाने के बाद भी न्यायालय के अंतरिम आदेश की पालना नही की जा रही है, और दूसरी ओर, निदेशालय से 9 जनवरी को नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिया गया, जिससे याचीगण को कटऑफ से ज्यादा अंक होने के बाद भी नियुक्ति से वंचित रहना पड़ा है। इस पर हाइकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व आदेश की पालना नहीं होने की स्थिति में, नागौर सीएमएचओ को व्यक्तिशः तलब करते हुए प्रकरण की अगली पेशी 23 जनवरी तय की है।


