किशनगढ़बास में 4.50 करोड़ रुपए की लागत से बना राजकीय कन्या महाविद्यालय का भवन पिछले एक साल से बंद पड़ा है। वहीं, 240 छात्राएं सरकारी अस्पताल की धर्मशाला की दो कोठरियों और खुले छत पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कस्बे के मोठूका रोड पर लगभग आठ बीघा भूमि पर यह बहुमंजिला कन्या महाविद्यालय भवन निर्मित है। इसमें आठ कक्षाएं, लैब, प्राचार्य कक्ष और शौचालय जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। भवन के ग्राउंड फ्लोर पर पांच और प्रथम तल पर तीन कमरे तैयार हैं। करोड़ों की लागत से बना यह भवन वर्तमान में बदहाली का शिकार है। रखरखाव के अभाव में इसकी खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं, दरवाजों को नुकसान पहुंचा है और परिसर में गंदगी फैली हुई है। मुख्य गेट पर बकरियां चरती हुई भी देखी जा सकती हैं। आधुनिक सुविधाओं से युक्त खाली पड़ा कॉलेज भवन
एक तरफ जहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉलेज भवन खाली पड़ा है, वहीं दूसरी ओर छात्राएं काले खां बाग स्थित सरकारी अस्पताल की धर्मशाला में पढ़ाई कर रही हैं। धर्मशाला में केवल दो छोटे कमरे उपलब्ध होने के कारण जगह की भारी कमी है। इस वजह से छात्राओं को खुले आसमान के नीचे छत पर कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। भूगोल विषय के शिक्षक नीरज अग्रवाल छत पर मात्र तीन छात्राओं को पढ़ा रहे थे। संसाधनों और पर्याप्त स्टाफ के अभाव में छात्राओं की उपस्थिति भी लगातार घट रही है और कई छात्राएं पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रही हैं। नोडल प्रभारी बोले-चारदीवारी के बिना छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं
कॉलेज प्रशासन और जनप्रतिनिधि अब भवन के चारों ओर बाउंड्री वॉल न होने को शिफ्टिंग में सबसे बड़ी बाधा बता रहे हैं। नोडल प्रभारी काकुली चौधरी का कहना है कि कॉलेज सुनसान क्षेत्र में है और बिना चारदीवारी के छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। बाउंड्री वॉल को मूल योजना में नहीं किया शामिल
जब 4.50 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ, तब बाउंड्री वॉल को मूल योजना में शामिल क्यों नहीं किया गया? क्या कन्या महाविद्यालय के लिए सुरक्षा को प्राथमिकता देना सिस्टम की जिम्मेदारी नहीं थी? खराब प्लानिंग का सीधा खामियाजा आज छात्राएं भुगत रही हैं।


