सीहोर जिले की सभी मंडियों में भावांतर योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वीडियो निगरानी शुरू कर दी गई है। कलेक्टर बालागुरू के. ने वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी है। अब मंडी में आते ही किसान का चेहरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली का नंबर रिकॉर्ड किया जा रहा है। मंडी गेट पर किसानों की पंजीकरण, आधार और ऋण पुस्तिका की जांच भी हो रही है। मंडी उपनिरीक्षक जगदीश मौर्य ने बताया कि अब केवल पंजीकृत किसान, उसका बेटा या भाई ही उपज बेच सकता है। इससे पहले कुछ व्यापारी फर्जी तरीके से किसानों का रिकॉर्ड इस्तेमाल कर अपना माल बेच देते थे। कुछ किसान इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंडियों में लंबी लाइनें लग रही हैं और समय बर्बाद हो रहा है। साथ ही रकबे का पूरा माल एक ही वाहन में नहीं आ पाता, जिससे परेशानी होती है। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वीडियोग्राफी होगी वीडियो रिकॉर्डिंग के अलावा, मंडी में आए वाहनों की संख्या और पोर्टल पर दर्ज डेटा का मिलान वीडियो साक्ष्य से किया जाएगा। नोडल अधिकारियों को व्यापारियों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि किसी मंडी में उपज की आवक अचानक बढ़ती है, तो वहां की जांच की जाएगी। अंतिम तारीख 15 जनवरी भावांतर योजना के तहत सोयाबीन बेचने की अंतिम तारीख 15 जनवरी है। इसके बाद खरीदी बंद हो जाएगी। प्रशासन शेष 26 हजार किसानों की उपज खरीदने के लिए प्रयासरत है। सचिव नरेंद्र महेश्वरी ने बताया कि यह व्यवस्था केवल फर्जीवाड़ा रोकने के लिए लागू की गई है।


