राजसमंद जिले के झोर और बागपुरा गांवों में पशुचिकित्सा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस साल मवेशियों का नियमित टीकाकरण समय पर नहीं होने के कारण खुरपका-मुंहपका रोग फैल गया है। कई पशु इसकी चपेट में आ गए हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत और असंतोष दोनों बढ़ते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि झोर गांव में पशुचिकित्सा कार्मिक तैनात होने के बावजूद पशुपालकों को राहत नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों ने की नियमित टीकाकरण की मांग। सूचना के बाद भी नहीं मिल रहा इलाज झोर गांव के पशुपालक गोपीलाल जाट, किशनलाल जाट, मदन खारोल और बबलू खारोल ने बताया कि उन्होंने बीमारी की सूचना कई बार विभागीय कर्मचारियों को दी, लेकिन न तो समय पर इलाज के लिए कोई पहुंचा और न ही निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल एक जगह बैठकर सर्वे कर खानापूर्ति की जा रही है। चिकित्सक तैनात, फिर भी निजी इलाज की मजबूरी ग्रामीणों का कहना है कि झोर गांव में पशु चिकित्सक तैनात होने के बावजूद उन्हें सरकारी स्तर पर राहत नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में पशुपालकों को निजी कंपाउंडरों से महंगे दामों पर इलाज कराना पड़ रहा है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। बागपुरा में भी मवेशियों की हालत गंभीर इधर बागपुरा गांव में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। ग्रामीण बालचंद्र शर्मा ने बताया कि कई मवेशियों के मुंह से लार और झाग निकल रहा है, वे चारा नहीं खा पा रहे हैं और दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई है। इससे पशुपालकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। कार्रवाई और राहत की मांग ग्रामीणों ने पशुपालन विभाग से तत्काल प्रभाव से बीमार मवेशियों का इलाज, नियमित टीकाकरण और लापरवाह कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो बीमारी और आर्थिक नुकसान दोनों बढ़ते जाएंगे।


