बीजापुर विधायक ने DFO पर लगाया दादागिरी का आरोप:पेड़ों की कटाई मामले में ग्रामीणों के समर्थन में उतरे, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने डीएफओ रंगनाधा रामकृष्ण पर दादागिरी का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे ग्रामीणों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। मामल पेड़ कटाई से जुड़ा है। दरअसल, पेद्दाकोड़ेपाल और कावड़गांव क्षेत्र में वन विभाग की पेड़ों की कटाई से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि वन विभाग टेढ़े-मेढ़े और उम्रदराज पेड़ों का बहाना बनाकर मनमाने ढंग से कटाई कर रहा है। महुआ-तेंदू जैसे पेड़ों की अंधाधुंध कटा आरोप है कि आदिवासी जीवन से जुड़े महुआ, टोरा, तेंदू जैसे महत्वपूर्ण वनोपज वृक्षों के साथ ही सागौन और बीजा जैसे बेशकीमती इमारती लकड़ी के पेड़ भी अंधाधुंध काटे जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महुआ और तेंदू उनके पारंपरिक जीविकोपार्जन का मुख्य आधार हैं। विरोध की अनदेखी का आरोप ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं, लेकिन उनकी आपत्तियों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों पर मनमानी और दबंगई का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह कटाई जिला वन अधिकारी रंगनाधा रामकृष्ण वाय के संरक्षण में हो रही है। जिसमें ग्राम सभाओं की सहमति या स्थानीय लोगों को विश्वास में लेना भी जरूरी नहीं समझा गया। इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी ग्रामीणों के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने डीएफओ को तत्काल हटाने और पेड़ कटाई पर रोक लगाने की मांग की। आदिवासी अधिकारों की उपेक्षा अस्वीकार्य विधायक ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर उनकी आजीविका और अधिकारों की उपेक्षा अस्वीकार्य है। उन्होंने जोर दिया कि वन संरक्षण का मतलब केवल जंगल नहीं, बल्कि जंगल-निर्भर लोगों की सुरक्षा भी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जांच पूरी होने तक कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की। इधर, ग्रामीणों ने भी स्पष्ट किया है कि वे अपने जंगल और जीविका की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ेंगे और मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करेंगे। वन विभाग का पक्ष वहीं, बीजापुर वनमंडलाधिकारी का कहना है कि कटाई नियमानुसार हो रही है। यह विवाद आदिवासी अधिकारों और वन संरक्षण के बीच टकराव को उजागर करता है।

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