जीएनडीएच में 210 गार्ड होने के बाद भी स्टाफ में वाहन चोरी होने का डर

भास्कर न्यूज | अमृतसर गुरु नानक देव अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पेस्को के तहत 210 सिक्योरिटी गार्ड रखे गए हैं। इसके लिए सरकार की ओर से निजी कंपनी को लाखों रुपए भी दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी यह गार्ड अस्पताल में कहीं नजर ही नहीं आते हैं। एक शिफ्ट में 60 सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी है, लेकिन वार्डों समेत इमरजेंसी और मेन गेट पर इक्का दुक्का गार्ड ही दिखते हैं। इसके कारण अस्पताल स्टाफ और मरीजों के अटेंडेंट को अपने वाहन चोरी होने का डर सता रहा है। हालात यह हैं कि कर्मचारी अस्पताल के अंदर ही अपने वाहन पार्क कर रहे हैं। पहले रेडियोलॉजी विभाग में भी स्टाफ अंदर पार्किंग करता था, लेकिन कुछ दिनों पहले अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने नोटिस चस्पा कराए थे िक यदि बिल्डिंग के अंदर किसी का वाहन लगा मिला तो टायर की हवा निकाल दी जाएगी। उसके बाद भी लोग अंदर वाहन पार्क कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मेन गेट पर ही गार्ड दिखाई नहीं देते, कोई भी अंदर एंट्री कर जाता है। किसी संदिग्ध से कोई पूछताछ नहीं की जाती। बेबे नानकी वार्ड के एंट्री गेट के बिलकुल साथ ही बाइकें और एक्टिवा लगाई जाती हैं। छुट्टी के दिन तो यह वाहन अंदर लैब तक पहुंच जाते हैं। कैमरे लगे होने के बाद भी अंदर वाहन पार्क करने वालों से कोई पूछताछ नहीं होती। नाम न बताने की शर्त पर स्टाफ ने कहा िक बाहर वाहन की कोई गारंटी नहीं है। बहुत से स्टाफ सदस्यों और पीजी डॉक्टरों के वाहन चोरी हो चुके हैं। इसलिए उन्हें वाहन चोरी होने का खत्तरा रहता है। उन्होंने कहा कि स्टाफ के लिए एमएस ऑफिस के पास पार्किंग बनी है, लेकिन वहां से स्कूटी चोरी हो चुकी हैं। इसलिए स्टाफ की पार्किंग में कर्मचारी तैनात किए जाने चाहिए, ताकि उनके वाहन सुरक्षित रह सकें। यहां रोजाना 4-5 हजार लोगों का आना जाना होता है। कुछ लोग तो पार्किंग में अपने वाहन लगा देते हैं, लेकिन कुछ नहीं लगाते थे। 1 जनवरी से पार्किंग का नया ठेका हुआ है। इसमें गुरु नानक अस्पताल की हर एंट्री पर कर्मचारी लगाए गए हैं। जिन्हें बिना पर्ची के बाहर जाने नहीं दिया जाता। इससे मरीजों और उनके अटेंडेंट के वाहनों की चोरियों पर तो लगेगी, लेकिन स्टाफ के वाहन की अभी भी कोई सुरक्षा नहीं है।

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