लोहड़ी पर्व की महत्ता:जिस पुनर्वसु योग में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ, उसमें इस बार लोहड़ी पर्व शुभ

भास्कर न्यूज | अमृतसर लोहड़ी पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इसे और भी खास बनाता है। यह शुभ योग धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए बेहद प्रभावशाली माना गया है। हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी पर्व मनाया जाता है। इस बार लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को मनाया जाएगा। इसमें पुनर्वसु शुभ योग बन रहा है, जो पूरे दिन रहने वाला है। ज्योतिषाचार्य राधे श्याम शास्त्री के मुताबिक अनुसार इस पुनर्वसु नक्षत्र में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। इसलिए भी यह बहुत शुभ माना जा रहा है। वहीं धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए धार्मिक कार्यों और घर में पूजा-अर्चना करने से धन-संपदा, सुख-शांति और समृद्धि आती। लोहड़ी का त्यौहार जीवन में खुशियां और नई ऊर्जा का प्रतीक है। इस शुभ योग में विधि से पूजा और दान-पुण्य करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। लोहड़ी का पर्व फसल कटाई और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। इसे मुख्य रूप से किसानों का त्यौहार कहा जाता है। इस दिन लोग अग्नि में तिल, गुड़, गन्ना, मूंगफली, रेवड़ी आदि अर्पित करते हैं और अपने घर के लिए सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। लोहड़ी की रात को जलती हुई अग्नि के चारों ओर नृत्य और गीत गाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोहड़ी पर सुबह स्नान करके साफ-कपड़े धारण करें। घर या खुले स्थान पर लकड़ी और उपलों से अग्नि प्रज्वलित करें। वहीं अग्नि में तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित करें। सूर्यदेव को जल अर्पित करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। जबकि परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ लोहड़ी के भुग्गा के चारों तरफ बैठकर लोहड़ी गीत गाएं।

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