इंदौर में ‘शून्य से शतक’ कार्यक्रम में बोले सीएम:क्या ममता, क्या जयललिता, क्या मायावती….सब जगदंबा ही जगदंबा; अटलजी कैसे इन्हें पाढ़ते होंगे

देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर इंदौर में रविवार को ‘शून्य से शतक’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन डेली कॉलेज स्थित धीरूभाई अंबानी सभागृह में हुआ। इसमें देश और प्रदेश के कई शीर्ष पदाधिकारी शामिल हुए। देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगु भाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस अवसर पर चार विशिष्ट विद्वानों को ‘अटल अलंकरण’ से सम्मानित किया गया। सुमित्रा महाजन, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, बीजेपी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा मौजूद। कार्यक्रम में सीएम का चुटीला अंदाज भी देखने को मिला। मंच से संबोधित करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ममताजी को तो आज भी कंट्रोल करना मुश्किल है, अटलजी ने सरकार कैसे चलाई होगी। क्या ममता, क्या जयललिता…पता नहीं अटल जी कैसे इन्हें पूरा पाढ़ते (झेलते) होंगे। कैसे काम चलता होगा। सब एक से बढ़कर एक…क्या मायावती, क्या जयललिता, क्या ममता सब जगदंबा ही जगदंबा…आनंद ही आनंद।
अटलजी ने कैसे आनंद के साथ आराम से धीरे-धीरे…उनकी दुनिया भी कैसी थी, सरकार चलाई तो कैसी चलाई। आनंद के साथ इतने दलों की सरकार चलाएं तो कलेजा चाहिए। सरकार चलाने में भी उन्होंने परमाणु बम के मसले पर निर्णय किया। सीएम ने कहा कि हां भारत को शक्ति संपन्न होना चाहिए। भारत को स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार है, तो आनंंद आता है। एक साथ नहीं फोड़े, आज एक बम फोड़ा पूरा देश उछल गया। दूसरे दिन फिर दूसरा फोड़ दिया। लोगों ने कहा प्रतिबंध लगा देंगे तो तीसरे दिन फिर फोड़ दिया। चौथे दिन फिर फोड़ दिया। ये अटलजी ही कर सकते थे।
सीएम ने कहा कि मैं अगर मालवी भाषा में बोलूं तो आदमी को खजवाने के काम की दृष्टि से, लेकिन परमाणु बम की ताकत के साथ शक्ति संपन्न बनाने में जो उन्होंने योगदान दिया, जो उनका वाक्य है सब बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते हैं। अटलजी केवल एक व्यक्ति नहीं, विचार और मिशन थे: उपराष्ट्रपति आयोजन में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी राधाकृष्णन ने कहा कि स्व. अटलजी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार और मिशन थे। उनके कर्म, आदर्श और सुशासन की दृष्टि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश हैं। उन्होंने अटल फाउंडेशन के मंच से अटलजी के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्व. अटलजी संवाद, समावेशी विकास और मानवीय सुशासन में विश्वास रखते थे। सांसद, कवि और प्रधानमंत्री, हर भूमिका में उन्होंने सार्वजनिक विमर्श को गरिमा दी और सिद्ध किया कि राजनीति सिद्धांतनिष्ठ और करुणामय हो सकती है। स्व. अटलजी की विरासत को आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं और देश को विकसित भारत – 2047 के लक्ष्य की ओर दृढ़ता से अग्रसर कर रहे हैं। अटलजी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा था- जब तक एक भी पाकिस्तानी मेरी धरती पर है, मैं उसका प्रतिकार करूंगा
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अटलजी की सरकार ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया, लेकिन दुनिया की कोई एजेंसी यह नहीं पता लगा सकी कि 11 मई 1998 को क्या होने वाला है। पाकिस्तान, अमेरिका, रूस किसी को नहीं पता चला कि भारत परमाणु शक्ति बनने जा रहा है। किसी को कोई सुराग नहीं लगा। यह अटलजी का तरीका था। अटल नाम ऐसा था कि वे हमेशा अपने सिद्धांतों पर भी अटल रहे। कारगिल युद्ध के समय जब अमेरिकी राष्ट्रपति का फोन आया तो अटलजी ने साफ शब्दों में कहा था कि जब तक एक भी पाकिस्तानी मेरी धरती पर है। मैं पूरी ताकत से उसका प्रतिकार जरूर करूंगा। अटलजी संवेदनशील और स्वाभिमानी राष्ट्रभक्त थे: राज्यपाल
राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने कहा कि अटल जी की जन्म शताब्दी केवल पुण्य स्मरण का प्रसंग नहीं, बल्कि उनके विराट व्यक्तित्व, उच्च आदर्शों और दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरणा प्राप्त करने का पावन क्षण है। उन्होंने स्वयं को भाग्यशाली बताते हुए कहा कि उन्हें अटल जी के सानिध्य में काम करने का अवसर मिला, जहां उनके महान आभामंडल में रहकर उन्हें करीब से देखने, समझने और उनसे प्रेरित होने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि अटल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को कुछ शब्दों में समेटना संभव नहीं है, वे एक विराट व्यक्तित्व और एक चलता-फिरता महाकाव्य थे। उनकी वाणी में ओज था, जो जनमानस में ऊर्जा और राष्ट्रभाव का संचार करती थी। चार विभूतियां अटल अलंकरण से सम्मानित प्रसिद्ध कवि सत्यनारायण सत्तन, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया, भारतीय क्रिकेट टीम की चयन समिति के पूर्व चयनकर्ता संजय जगदाले और सागर के पारंग शुक्ला को ‘अटल अलंकरण’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बीएसएफ के बैंड द्वारा ‘वंदे मातरम’ की संगीतमय प्रस्तुति से की गई। इसके बाद अटलजी के जीवन, विचार और योगदान पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान अटलजी से जुड़े संस्मरणों पर आधारित पुस्तक ‘सदा अटल महाग्रंथ’ के तीसरे संस्करण के कवर पेज का भी लोकार्पण किया गया। भूमिपूजन व लोकार्पण अटलजी को समर्पित करेंगे मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 दिसंबर को जन्म शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर ग्वालियर से 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक के औद्योगिक निवेशों/विकास कामों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण अटलजी को समर्पित किया जाएगा, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा अटल जी मध्यप्रदेश की धरती से निकले ऐसे महापुरुष हैं, जिनका योगदान विश्व लोकतंत्र को गौरव प्रदान करता है। समारोह में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु द्वारा प्रेषित शुभकामना संदेश का वाचन भी किया गया। वहीं उपराष्ट्रपति ने डेली कॉलेज परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का अनावरण भी किया। मुख्यमंत्री पहुंचे पराठा हाउस, पोहा-जलेबी का लुत्फ उठाया ‘शून्य से शतक’ कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एयरपोर्ट जाते हुए अचानक मौसा पराठा हाउस पहुंच गए। यहां उन्होंने इंदौरी पोहा-जलेबी और गरमा गरम चाय का लुत्फ उठाया। साथ ही रेस्टोरेंट के सभी वर्कर के साथ फोटो खिंचाई। इस मौके पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और अन्य नेता भी उनके साथ थे।

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