बाघ पर सवार होकर आएगी संक्रांति:मकर संक्रांति चार शुभ योगों में मनाई जाएगी सुबह 8:50 पर मकर राशि में होगा सूर्य प्रवेश

मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा जो चार शुभ योगों में दान पुण्य का पर्व माना जाता है । संक्रांति बाघ पर सवार होकर आएगी। इस दिन जप, तप और दान का महत्व है। पं. जितेंद्र भारद्वाज पोपा गुरू ने बताया कि 14 जनवरी को सुबह 8.50 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ धनु मलमास समाप्त हो जाएगा। इसके साथ मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। ज्ञात रहे 13 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश के कारण धनु मलमास लग गया था। इसके चलते इस एक माह मे मांगलिक कार्यों पर रोक थी। 14 जनवरी को दान-पुण्य पर्व मकर संक्रांति मनाया जाएगा। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र निष्कुंभ योग व कुमार योग का शुभ योग बन रहा है। संक्रांति का वाहन बाघ है। संक्रांति बाघ पर सवार होकर आएगी और धोबी के घर प्रवेश करेगी। पौराणिक मान्यतानुसार इस दिन पशुओं को हरा चारा डालने, खिचड़ी, तिल से बनी खाद्य सामग्री और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। विद्वान पंडितों ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार सूर्य 6 महीने उत्तरायन और 6 महीने दक्षिणायन रहता है। भगवान सूर्य मकर संक्रांति के दिन उत्तरायण यानी मकर से उत्तर दिशा की ओर जाते हैं। इसलिए इस पर्व को उत्तरावणी पर्व भी कहा है। इस दिन तिल, गुड़ दान की है परंपरा काले तिल का दान दुर्भाग्य दूर करने वाला बताया गया है। सूर्यदेव, भगवान विष्णु और शनिदेव प्रसन्न होते हैं। गुड़ भी दान करना चाहिए। गुड़ का दान करने से गुरु, शुक्र और शनि तीनों ग्रहों की कृपा मिलती है। नमक दान करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इसलिए इस दिन नमक का दान करना चाहिए। उनी वस्त्र भी दान करने चाहिए। इससे शनि और राहु के दोष मिटाने के लिए जरूरतमंद को ऊनी कपड़ों का दान श्रेष्ठ माना गया है। घी का संबंध गुरु और सूर्य से है। इनकी प्रसन्नता के लिए घी के व्यंजनों का दान करना चाहिए। वहीं शनि मंदिर में सरसों तेल चढ़ाने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है। जीवन में सुख-समृद्धि का वास रहता है। काली चीजें शनि व राहु दोष दूर होते हैं। इसलिए नए काले कपड़े, काले कंबल, उड़द आदि का दान कर सकते हैं। गंगा स्नान के बाद गरीबों को रेवड़ी और मूंगफली देने का उल्लेख संकट हरने वाला बताया है। पशुओं को चारा दान करने या खिलाने से इससे घर में खुशहाली रहती है। वहीं गाय की कृपा परिवार में प्रेम और वात्सल्य को बढ़ाती है। मंदिर या पवित्र नदी में दीपदान से शुभ फलों की प्राप्ति होती है, इसलिए सभी को यह सब करना चाहिए।

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