जिला परिषद के जिला प्रमुख और वार्ड नंबर 8 के सदस्य का चुनाव फिर एक बार सुर्खियों में हैं। तत्कालीन जिला प्रमुख जगत सिंह के नदबई क्षेत्र से विधायक बनने के बाद 15 दिसंबर 2023 को जिला प्रमुख व वार्ड नंबर 8 के सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। पिछले 13 माह से ये दोनों ही पद रिक्त हैं, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत नियमानुसार इस्तीफा देने के बाद 6 माह में चुनाव होना चाहिए था। लेकिन दो बार मार्च 2024 व जून 2024 में चुनाव की तिथियां घोषित होने के बाद भी सरकार चुनाव टालती रही। जिला प्रमुख का चार्ज जिला कलेक्टर को सौंपा हुआ है। परंतु अब इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद नया मोड़ आ गया है। अब हाईकोर्ट के न्यायाधिपति महेंद्र कुमार गोयल ने झारकई जिला भरतपुर निवासी सुनील चौधरी पुत्र इंदर सिंह की दायर की गई सिविल रिट में दिए आदेश के बाद 60 दिन में सरकार को चुनाव कराना पड़ेगा। इस आदेश के बाद जिले की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और राजनैतिक गलियारे में राज्य सरकार की एक प्रदेश एक चुनाव की घोषणा को लेकर हड़कंप मचा हुआ है कि सरकार ऐसे में चुनाव कराएगी या नहीं? हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। राजस्थान कांग्रेस ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री जी..भरतपुर जिला प्रमुख का चुनाव कब तक टालोगे? अब तो हाईकोर्ट ने भी चुनाव कराने का आदेश दे दिया, फिर किस बात का डर है? कोर्ट के आदेश के बाद अब 60 दिन में भरतपुर जिला प्रमुख, जिला परिषद और वार्ड-8 के सदस्यों का चुनाव कराना पड़ेगा। सितंबर 2023 के बाद करीब 16 माह से एक भी साधारण सभा की बैठक नहीं हुई है, जबकि प्रत्येक 3 माह में एक बार साधारण सभा की बैठक होनी चाहिए। बीच में एक बार 20 सितंबर 2024 को जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक बुलाई थी, लेकिन 36 में से सिर्फ 4 सदस्य ही उपस्थित हुए और कोरम पूरा नहीं होने की वजह से वह भी स्थगित हो गई। इसमें 19 सदस्य उपस्थित होने जरूरी थे। अब फिर 17 जनवरी को दोपहर 3 बजे जिला कलेक्ट्रेट के सभागार में जिला कलेक्टर व कार्यवाहक जिला प्रमुख डॉ. अमित यादव की अध्यक्षता में बुलाई है। जिसके एजेंडा में विभिन्न अनुमोदन के कार्य ही होने हैं। इधर बैठक नहीं होने की वजह से भरतपुर व डीग जिले की 374 ग्राम पंचायत व 12 पंचायत समितियों के विकास के कार्य अटके पड़े हैं। जिला परिषद में हर साल राज्य वित्त आयोग (एफएफसी) मद व 15वें वित्त आयोग (एसएफसी) मद से गांवों के विकास कार्यों के लिए बजट आता है, जो करीब 5-5 करोड़ की हर साल 4 किस्त आती हैं। चुनाव नहीं तो सरकार से ज्यादा निर्वाचन आयोग होगा डिफॉल्टर “हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार की एक प्रदेश एक चुनाव की घोषणा का कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि जिप सदस्यों का अभी कार्यकाल बाकी है। जितना कार्यकाल है, उतने समय के लिए रिक्त पदों के लिए चुनाव कराना होगा। चुनाव नहीं होने पर सरकार से ज्यादा डिफाल्टर निर्वाचन आयोग होगा। आयोग को खाली हुई सीट पर नियमानुसार 6 माह में चुनाव कराने चाहिए थे।” -अशोक जैन, पूर्व संयुक्त निर्वाचन अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग, जयपुर


