वन विहार नेशनल पार्क में गुजरात के जूनागढ़ से लाए गए एशियाई शेरों के जोड़े में शामिल नर सिंह ने केनाइन डिस्टेंपर जैसी घातक बीमारी को मात दे दी। करीब सात माह तक चले उपचार और सतत निगरानी के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। रविवार को उसे दोबारा सिंहनी के बाड़े में छोड़ा गया। वन्य प्राणी चिकित्सकों के अनुसार यह देश का पहला शेर है, जिसने इतनी गंभीर और जानलेवा बीमारी से पूरी तरह उबरकर नया जीवन पाया है। गुजरात ने वन विहार को एशियाई शेरों का जोड़ा दिया था। यह 21 दिसंबर 2025 को जूनागढ़ चिड़ियाघर से लाया गया था। जून में नर सिंह में केनाइन डिस्टेंपर के लक्षण सामने आए। तुरंत उसे क्वारंटाइन किया गया, ताकि संक्रमण अन्य जीवों में न फैले। वायरस लोड अधिक होने के कारण लंबे समय तक अलग रखकर इलाज किया गया। स्वस्थ होने की पुष्टि के लिए सैंपल जबलपुर सहित देश की पांच प्रयोगशालाओं में जांचे गए। सभी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर नर सिंह को बाड़े में छोड़ा गया। भास्कर नॉलेज इतनी संक्रामक कि गुजरात में 23 सिंह की मौत
केनाइन डिस्टेंपर शेर, बाघ और तेंदुए जैसे मांसाहारी जीवों के लिए घातक होती है। संक्रमित जानवर की आंख-नाक से निकले स्राव, लार,मूत्र से यह तेजी से फैलता है। इससे पहले नेपाल में पांच और गुजरात में 23 शेरों की इसी से मौत हो चुकी है। सात माह इलाज के बाद अब वह पूरी तरह से ठीक है। इससे वन्य जीवों के उपचार के लिए भी नई उम्मीद बनेगी। यह न केवल वन विहार बल्कि पूरे प्रदेश के लिए वन्य प्राणियों को नई जिंदगी देने वाली एसओपी बनाई जा रही है, जो सभी टाइगर रिजर्व और चिड़ियाघर को भेजी जाएगी। -विजय कुमार, डायरेक्टर वन विहार


