शहडोल में 16 जनवरी को होने वाली रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। आदिवासी बाहुल्य वाले शहडोल संभाग में पहली बार कोई बड़ा औद्योगिक आयोजन हो रहा है। लगभग 5000 उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य आगंतुकों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। 14 या 15 जनवरी को मुख्यमंत्री संभाग के तीनों जिलों के उद्योगपतियों से वीसी के माध्यम से चर्चा करेंगे। इसकी तैयारी भी हो रही है। शहडोल संभाग मुख्य रूप से कोल माइनिंग, गेहूं, चावल,मोटे अनाजों की खेती के लिए और घने जंगलों के लिए जाना जाता रहा है। इन्हीं सेक्टर पर फोकस रखते हुए शहडोल में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन होगा। उद्योग प्रमुख सचिव प्रदेश की संभावनाएं और नीतियां प्रेजेंटेशन में रखेंगे। बाद में एमएसएमई विभाग प्रेजेंटेशन में अपनी नीतियां और सुविधाओं के बारे में प्रेजेंटेशन देगा। मुख्यमंत्री वन तो वन चर्चा में उद्योग प्रतिनिधियों से मुखातिब होंगे। क्षेत्र की विशेषताएं आयोजन स्थल में दिखाई जाएंगी। पूरे क्षेत्र में परंपरागत रूप से कोल माइनिंग का काम होता रहा है। साथ ही कृषि क्षेत्र भी समृद्ध रहा है। चिन्नौर, विष्णुभोग, दुबराज अच्छे किस्म के चावल की उपज होती है। साथ ही गेहूं और कोदो कुटकी जैसे मोटे अनाज भी बड़ी मात्रा में लगाए जाते हैं। सरसी, बांधवगढ़ और अमरकंटक जैसा पर्यटन सर्किट मौजूद है, इसे निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। कलेक्टर बोले -अब तक क्षेत्र में भारी संभावनाएं
शहडोल कलेक्टर केदारसिंह ने कहा कि आयोजन स्थल में तैयारियां जारी हैं। शहडोल और उमरिया के बीच की सड़कों में जहां 4 पुल बन रहे हैं, वहां सड़कों को सुधार कर बेहतर बना रहे हैं। रीवा, कटनी और जबलपुर से सड़क मार्ग से मेहमान लाए जाएगे। सिंह ने कहा कि क्षेत्र में गेहूं, धान, मोटे अनाज के अलावा कोयला, बॉक्साइट, ग्रेनाइट जैसे खनिज हैं। मीथेन आधारित थर्मल पावर प्लांट, कोक आधारित यूनिट, छोटी स्टील यूनिट जैसी कंपनियों ने रूचि दिखाई है। रिलायंस, बिड़ला, अडानी जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि आएंगे।


