कोटा विश्वविद्यालय में कार्यरत अशैक्षणिक निविदा कर्मचारियों ने पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिलने के विरोध में विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के बाहर धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताई। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहा है। अशैक्षणिक निविदा कर्मचारी महासंघ के संगठन महासचिव अजय प्रजापति ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है और 30 दिसंबर को पूरे दो महीने हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब सरकारी कर्मचारियों को हर महीने एक या दो तारीख तक वेतन मिल जाता है, तो निविदा कर्मचारियों को भी कम से कम 5 या 6 तारीख तक भुगतान किया जाना चाहिए। लेकिन यहां हालात यह हैं कि 8 से 10 हजार रुपये की मामूली तनख्वाह भी समय पर नहीं दी जा रही। प्रजापति ने आरोप लगाया कि वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने घर-गृहस्थी चलाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, किराया और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें यह कहकर टाल रहा है कि वे विश्वविद्यालय के कर्मचारी नहीं, बल्कि ठेका कर्मी हैं। नाराज़ कर्मचारियों ने साफ कहा है कि जब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक उनका धरना और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।


