52KM की सड़क 56 करोड़ से 120 करोड़ पहुंची:हर 2KM की निविदा, स्पेशल-प्रोजेक्ट के तहत शुरू हुआ था काम, भ्रष्टाचार की खबर बनाई तो पत्रकार को मार डाला

बीजापुर में नक्सल प्रभावित इलाके में गंगालूर-मिरतुर की सड़क में 2 से 3 किमी के अंदर ही करीब 100 से ज्यादा छोड़े-बड़े गड्ढे हैं। गड्ढे को भरने सीमेंट और गिट्टी डाला गया है। पैच वर्क का काम कर लीपापोती किया गया है। सड़क की दुर्दशा ऐसी है कि हाथ से ही डामर उखड़ रही है। यह 120 करोड़ रूपए की वही सड़क है जिसकी खबर बनाने पर पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई। दरअसल, साल 2009 में भारत सरकार ने सड़क आवश्यकता योजना स्पेशल प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। इस प्रोजेक्ट के तहत नक्सल प्रभावित इलाके गंगालूर, मिरतुर से लेकर नेलसनार तक कुल 52.40 किमी की सड़क बननी थी। उस समय इस सड़क के लिए लगभग 56 करोड़ रुपए सेंक्शन थे। लेकिन अब यह बढ़कर 120 करोड़ रुपए पहुंच गई। हर 2 किमी के निर्माण के लिए निविदा जारी हुई थी। बताया जा रहा है कि, सड़क निर्माण का ठेका कुल 4 फर्म को मिला था। इस काम को 16 भागों में बांटा गया और अनुबंध किया गया। इसमें से एक बड़े हिस्से का काम वही ठेकेदार सुरेश चंद्राकर कर रहा था जिसपर बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का आरोप है। क्योंकि, मुकेश ने इस सड़क के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी थी। दैनिक भास्कर की टीम ने भी अब उसी सड़क के 52 किमी का सफर तय किया। हम बीजापुर से गंगालूर और यहां से मिरतुर होते हुए नेलसनार पहुंचे। गंगालूर के आगे 2 से 3 किमी में डामर बिछाया गया है। बताया जा रहा है कि यह पहला काम सुरेश चंद्राकर का था। वहां हमें करीब 100 से ज्यादा छोड़े-बड़े गड्ढे मिले। डामर उखड़ चुकी है। कुछ जगहों पर ठेकेदार ने लीपापोती कर पैच वर्क का काम भी करवा दिया है। गिट्टी और सीमेंट डालकर गड्ढे भरे पैच वर्क में सिर्फ गिट्टी और सीमेंट डालकर गड्ढे को भर दिया गया है, जो अब उखड़ रहा है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़क की बदहाल हालत है। सड़क निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। सड़क की हालत ऐसी है मानों की आप अपनी गाड़ी का बार-बार ब्रेक लगाएंगे, गियर बदलते रहेंगे। झाड़ू लगाएं तो गिट्टी और सीमेंट उखड़ जाएगी पैच वर्क ऐसा है यदि आप इसपर झाड़ू लगाएं तो गिट्टी और सीमेंट उखड़ जाएगी। पैच वर्क पर अपनी हथेली रगड़े तो गिट्टी और सीमेंट आप के हाथ में आ जाएगा। हम यहां से फिर आगे बढ़े, जहां कुछ दूरी पर हमें पहले मुरुम बिछी मिली। आगे मिरतुर से पहले स्थित एक सुरक्षबालों के कैंप तक कई जगहों पर सिर्फ गिट्टी बिछाकर रखी हुई थी। हालांकि सड़क निर्माण का काम रुका हुआ है। सड़क निर्माण की सुरक्षा के लिए तैनात है फोर्स दरअसल, गांगलूर से लेकर मिरतुर तक इस सड़क निर्माण काम की सुरक्षा के लिए कुल 3 से 4 सुरक्षाबलों ये कैंप स्थापित किए हैं। कुछ इलाके में नेटवर्क तक नहीं है। वहीं बिना किसी रुकावट के सड़क का निर्माण हो जाए इसके सैकड़ों जवानों की तैनाती की गई है। सवाल- 56 करोड़ रुपए का काम 120 करोड़ का कैसे हुआ? अब सवाल है कि इन 15 सालों में किमी आखिर उतना ही है जितना पहले था। जब यह सड़क 56 करोड़ रुपए में बननी थी तो यह 120 करोड़ रुपए कैसे हुई? इस सवाल का जवाब जानने हमने बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा से बातचीत करनी चाही लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया। पूर्व BJP नेता बोले- जमकर भ्रष्टाचार किया इस मामले को लेकर युवा आयोग के पूर्व सदस्य और पूर्व भाजपा नेता अजय सिंह का आरोप है कि सुरेश ने अधिकारियों के साथ मिलकर सांठ-गांठ की थी। टेंडर लिया और फिर सड़क निर्माण पर जमकर भ्रष्टाचार किया। उन्होंने कहा कि इस सड़क के लिए कुल 16 अनुबंध हुए थे। अब ये जांच का विषय है कि इसे 120 करोड़ कैसे कर दिया गया। उन्होंने कहा कि, यदि इस मामले की सिरे से जांच हो जाए तो कई बड़े नेता, कई अधिकारियों के नाम सामने आ सकते हैं। कुटरू-फरसेगढ़ का काम भी निरस्त ठेकेदार सुरेश चंद्राकर PWD का A कैटेगरी का ठेकेदार।था। बीजापुर जिले में उसके 7 प्रोजेक्ट थे। उसने जितने सड़क निर्माण का टेंडर लिया था उन सारे कामों को अब राज्य सरकार ने निरस्त कर दिया। इनमें कुटरू से फरसेगढ़ तक की भी सड़क और ब्रिज निर्माण है। ठेकेदार ने यहां मिट्टी फिलिंग का काम कर दिया था। लेकिन यह काम भी पिछले महीने भर से बंद था। अब इस काम को भी निरस्त कर दिया गया है। सरकार की तरफ से आए बयान में कहा गया था कि सुरेश के सारे टेंडर की जांच की जा रही है।

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