जलरंगों से तैयार 50 पेंटिंग्स में दिखी प्रकृति की खूबसूरती:जेकेके में डॉ सुषमा महाजन की सोलो पेंटिंग एग्जीबिशन वाइब्रेंट ह्यूज की शुरुआत

जवाहर कला केन्द्र की अलंकार आर्ट गैलरी में शहर की जानी-मानी आर्टिस्ट और वॉटर कलर के जरिए रंगों में जान फूंकने वाली डॉ. सुषमा महाजन की सोलो पेंटिंग एग्जीबिशन की रविवार से शुरुआत हुई। इस तीन दिवसीय सोलो पेंटिंग एग्जीबिशन ‘वाइब्रेंट ह्यूज’ में डॉ. सुषमा की 50 पेंटिंग्स डिस्प्ले की गई है, जिन्हें पिछले दो सालों में उन्होंने तैयार किया है। उनके रंगों निकले भाव, प्रकृति की खूबसूरती से सराबोर पेंटिंग्स और भारतीय कला, संस्कृति का संगम देखन को मिलता है। वेनिस की खूबसूरत इमारते, गलियां और खास रंगों की दुनिया भी डॉ. सुषमा की पेंटिंग्स का खास हिस्सा हैं। डॉ. सुषमा महाजन ने कहा कि जिन 50 पेंटिंग्स को इस एग्जीबिशन में शामिल किया गया है, उनमें विषयों की विविधता देखने को मिलती है। जिनमें विंटेज कार, नेचर, एनीमल्स, आर्किटेक्चर सरीखे विषयों को कनेक्ट किया गया है। जलरंग पेंटिंग में रचनात्मकता की कमी नहीं हैं। इसमें हैरिटेज, वास्तु, मंदिर, प्रकृति, पशु-पक्षी सहित विंटेज कार सहित कई वस्तुओं का समावेश है। विरासत को सहेजने और जानने की जरूरत है। मैं पेटिंग्स के माध्यम से विरासत को सहेजने का काम कर रही हूं। पेटिंग्स में वैसे मैं चटक रंगों का प्रयोग अधिक करती हूं। मुझे लगता है कि जिसे देखकर खुशी मिले, वहीं रंग काम में लेने चाहिए। इससे पेंटिंग्स में जान आ जाती है। डॉ सुषमा महाजन ने कहा कि मुझे लगता है हमारे आस-पास जो प्रकृति है, विरासत है, वह बहुत सुंदर है। मेरी कलाकृतियों का विषय प्रकृति है। जो पेड़-पौधे, पशु-पक्षी आप अपने आस-पास देखते हैं, उन्हें रुककर देखिए। उगता और अस्त होता सूरज ऐसे विषय है, जिन्हें आप रुककर देखेंगे तो सुंदर लगेगा। हम भागदौड़ भरी जिंदगी में इस ओर ध्यान नहीं देते। यही प्रकृति मेरी पेंटिंग्स का विषय है। यह डॉ. सुषमा महाजन अपनी सातवीं प्रदर्शनी है। इस बार उन्होंने इसे ‘वाइब्रेंट ह्यूज’ शीर्षक दिया है। इसमें जीवन के उत्साहपूर्ण भावों को समाहित किया गया है। डॉ. सुषमा कहती हैं कि ‘प्रकृति मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है। मेरा मानना है कि कला किसी व्यक्ति के अंतर्मन का प्रतिबिंब होती है और जब मैं एक चित्र बनाती हूं तो लगता है अपने जीवन को एक बड़ा और नया आयाम दे रही हूं, इसे और अधिक अर्थपूर्ण बना रही हूं।

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