योग गुरु अश्विनी का राजस्थान में विशेष शिविर:6 से 12 जनवरी तक 100 से ज्यादा साधकों को स्वर विज्ञान और योग का प्रशिक्षण दिया

राजस्थान में योग शिविर का आयोजन हुआ, जहां योग गुरु अश्विनी ने देश-विदेश से आए साधकों को उन्नत आध्यात्मिक प्रशिक्षण दिया। जयपुर के जयसिंहपुरा में आयोजित शिविर का रविवार को समापन हुआ। जिसमें 100 से अधिक साधकों ने भाग लिया। गुरु अश्विनी ने बताया- सांस को आत्मा और इस दुनिया के बीच का द्वार माना जाता है। उन्होंने हठ योग की व्याख्या करते हुए बताया कि ‘हम’ बाईं सांस और ‘ठम’ दाहिनी सांस को दर्शाता है। वे आधुनिक समय के एक ऐसे विरले गुरु हैं, जिन्होंने योग की जटिल सिद्धियों को ध्यान फाउंडेशन के माध्यम से हजारों लोगों के लिए सुलभ बनाया है। उनकी विशिष्ट योग्यताओं को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मुंबई ने भी मान्यता दी है। ध्यान फाउंडेशन की वेबसाइट पर यज्ञ से जुड़े अद्भुत फोटोग्राफिक साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। कोच्चि के लक्ष्मी अस्पताल के एमडी डॉ. प्रसन प्रभाकर, जो पहले एक संशयवादी थे, ने भी आश्रम में रहकर आध्यात्मिक अनुभवों की पुष्टि की है। उन्होंने प्राचीन ऋषियों की शक्तियों को मिथक नहीं, बल्कि वास्तविकता बताया, जिसका उन्होंने स्वयं अनुभव किया है। सत्र के पहले तीन दिनों में डॉक्टरों के मार्गदर्शन में शारीरिक और मानसिक क्षमताओं के परीक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि आने वाले दिनों में सिखाई जाने वाली उन्नत ध्यानाभ्यास के लिए प्रतिभागियों के स्वास्थ्य की स्थिति का पता लगाया जा सके। प्रतिभागियों को सुषुम्ना नाड़ी को शुद्ध करने और मंत्रों एवं रंग प्राण के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंग-प्रत्यंगों की ईथरिक सफाई के लिए क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। इस दौरान शुरू किए गए अन्य क्रिया-अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को सुरक्षा कवच बनाने के लिए दिव्य चिकित्सा मंत्र, चक्रों और कुंडलिनी गति को उत्तेजित करने के लिए चक्र बीज आसन, ध्यान-विज्ञान के माध्यम से चेतना का निर्माण और विचारों की अभिव्यक्ति सिखाई गई। एक दिलचस्प सत्र में प्रतिभागियों की मंत्र उच्चारण की शुद्धता और शक्ति का परीक्षण करने के लिए ध्यान फाउंडेशन मंत्र स्कैनर का उपयोग किया गया। इस ध्यान सत्र के अंतिम तीन दिन स्वर विज्ञान पर चर्चा होगी और प्रतिभागियों को सांस के सूक्ष्म पहलुओं के बारे में बताया जाएगा ताकि वे समझ सकें कि शरीर और पर्यावरण में परिवर्तनों को प्रभावित करने और आत्मा की यात्रा पर खुद को आगे बढ़ाने के लिए स्वर विज्ञान का कैसे उपयोग किया जाए।

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