फूड एंड ड्रग विभाग में प्रमोशन का अजीबोगरीब खेल चल रहा है। सहायक खाद्य अधिकारियों को तीन इंक्रीमेंट का जंप देकर सीधे अभिहित अधिकारी के पद पर प्रमोट कर दिया गया। दोनों पदों के वेतनमान का जबरदस्त अंतर है। सहायक खाद्य अधिकारी का वेतनमान 28 सौ है, जबकि अभिहित अधिकारी का वेतनमान 54 सौ है। बीच में हालांकि तीन वेतनमान हैं लेकिन कांग्रेस शासनकाल में बनाए नियम के तहत तीनों वेतनमान को जंप कर चौथे वेतनमान में प्रमोशन दे दिया गया। राज्य के 14 जिलों में सहायक खाद्य अधिकारी न होने का सबसे बड़ा कारण यही है। इस वजह से दिवाली जैसे त्योहार के दौरान भी 14 जिलों में एक भी खाद्य सामग्री के सैंपल की जांच नहीं की गई। खाद्य सामग्री का सैंपल लेकर मिलावट की जांच करने वाले अफसर अचानक फील्ड से कहां चले गए? इसकी पड़ताल करने के दौरान ही प्रमोशन के अजीबोगरीब सिस्टम का पता चला। ये खुलासा हुआ कि 2023 में पदोन्नति का नियम बदल दिया गया है। उस नियम के तहत 5 साल की सेवा पूरी करने वाले सहायक खाद्य अधिकारियों को सीधे अभिहित अधिकारी के पद पर प्रमोट करने की पात्रता दे दी गई है। उसी नियम के तहत सितंबर माह में दिवाली के ठीक पहले राज्य के सहायक फूड अधिकारियों को अभिहित अधिकारी के पद पर प्रमोशन दे दिया गया। प्रमोट होते ही उनकी पोस्टिंग फील्ड से हटाकर जिला मुख्यालयों में कर दी गई है। इस वजह से फील्ड में जांच बंद हो गई। 12 अफसरों को नए और 13 को पुराने नियम से दिया प्रमोशन खाद्य विभाग ने सितंबर माह में 25 सहायक खाद्य अधिकारियों को प्रमोट किया है। इसमें 13 अधिकारियों को पुराने नियम के तहत यानी उन्हें सीनियर फूड अॉफिसर से अभिहित अधिकारी बनाया गया है जबकि 12 खाद्य अधिकारियों को नए नियम के तहत यानी केवल 5 साल की सेवा पूरी करने पर अभिहित अधिकारी बना दिया। इसे लेकर भी विभाग में कई तरह की चर्चाएं हैं कि एक ही विभाग में दो तरह से प्रमोशन का सिस्टम कैसे है? परीक्षण करा रहे खाद्य अधिकारियों का प्रमोशन नियम के तहत किया गया है। किसी भी नियम को मंजूरी के पहले लॉ विभाग भेजा जाता है। वहां से मंजूरी के बाद ही लागू किया जाता है। फिलहाल नियम का परीक्षण करवा रहे हैं। नियम बदलने का निर्णय शासन को लेना है। दीपक अग्रवाल, कंट्रोलर फूड एंड ड्रग चरणबद्ध प्रमोशन सिस्टम किया खत्म राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के नियम में चरणबद्ध प्रमोशन का सिस्टम है। 2023 के पहले खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में भी ये नियम लागू था। इसके तहत 2800 के वेतनमान के बाद 4300 का वेतनमान दिया जाता था। उसके बाद 4400 वेतनमान देने का नियम था। उसके बाद 4800 फिर 54 सौ का वेतनमान देने का नियम था। नियमों में बदलाव कर 7 साल की सेवा पूरी करने वाले सहायक खाद्य अधिकारी का वेतनमान सीधे 54 सौ यानी दोगुना कर दिया गया। एक्सपर्ट व्यू – बीकेएस रे, रिटायर्ड एसीएस निहित स्वार्थ के लिए किए जाते हैं ऐसे बदलाव प्रमोशन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के नियम बने हुए हैं। नियमों में बदलाव किया सकता है, लेकिन जब इस तरह अजीबोगरीब और हैरान करने वाला बदलाव जिसमें सीधे तीन इंक्रीमेंट जंप किया गया है, ये साफ दिख रहा है कि ये निहित स्वार्थ की पूर्ति के लिए किया गया है। मैं एक बात हमेशा कहता हूं कि जब भी नीति या नियम में बदलाव किया जाए तो पूरी सतर्कता जरूरी है। जैसा नियम सभी विभागों के लिए है, उसमें बड़ा बदलाव नहीं करना चाहिए।’


