सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभाव को सशक्त करने के उद्देश्य से विराट हिंदू सम्मेलन पलारी में हुआ। मुख्य वक्ता जिला सह संघचालक राजेश्वर राव कृदत्त ने समाज में समरसता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि हम चाहे ईश्वर को साकार रूप में पूजने वाले हों या निर्गुण निराकार रूप में, चाहे किसी भी भौतिक स्थिति के रहने वाले हों, चाहे हमारा रंग कुछ भी हो, हम सभी को मिलकर एक राष्ट्र के लिए काम करना चाहिए। यही हमारी समरसता है। उन्होंने बच्चों में संस्कृति और धर्म के प्रति जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया। बच्चों को अपने धर्म और संस्कृति के बारे में बताएं। घर का आचरण ऐसा बनाएं कि बच्चे आपसे सीख सकें। मोबाइल या गूगल से ज्ञान लेने के बजाय बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव और संस्कार दें। पूर्व प्रांत सह संयोजक सुबोध राठी ने कहा कि आजकल की पीढ़ी मंदिर, हवन, कथा-सत्संग आदि को व्यर्थ मानती है। बच्चे जो देखते हैं वही करते हैं। यदि घरों में सुबह-शाम पूजा, बड़ों को प्रणाम और गीता-रामायण का पाठ नहीं होता तो संस्कृति का सही पालन कैसे होगा। कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहेब, गायत्री शक्ति पीठ डोटोपार मिलापा साहू ने हिंदू समाज की एकता, संस्कृति संरक्षण, सेवा, संस्कार और सामाजिक दायित्व को बताया। उन्होंने कहा कि समाज की शक्ति उसकी समरसता और संगठन में निहित है। समाज को संगठित रहकर अपने सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। कार्यक्रम में जिला प्रचारक सुपेश साहू, लिकेश हिंदू, यज्ञदत्त शर्मा, पुष्पेंद्र तिवारी, संतोष गंगबेर, एकनाथ सार्वा, लखन गुरुपंच, मुकेश सोनबेर, त्रिभुवन साहू, चम्पेश साहू आदि मौजूद थे।


