डूंगरपुर| पायोनियर शिक्षण संस्थान गढ़ी बांसवाड़ा में वागड़ी भाषा पर छठी कार्यशाला हुई। इसका संयोजन दिनेश प्रजापति ने किया। इस कार्यशाला में डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर के साहित्यकारों ने भाग लिया। कवि अरविंद पाटीदार बोदिया ने भामाशाह के रूप में सहयोग दिया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में संयोजक ने पूर्व कार्यों का समेकन करते हुए बताया कि वागड़ी भाषा को संरक्षित करना सामूहिक जिम्मेदारी है, क्योंकि हर सप्ताह एक भाषा लुप्त हो रही है। वरिष्ठ साहित्यकार उपेंद्र अणु ने वागड़ी भाषा के मानकीकरण, क्षेत्रीय टोन और शब्दों में एकरूपता लाने पर चर्चा की। भोगीलाल पाटीदार ने नियमित लेखन की सलाह दी। इतिहासकार घनश्याम प्यासा ने भाषा के शब्दकोश और व्याकरण निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए वागड़ी शब्दकोश के लिए सहयोग का आह्वान किया। वरिष्ठ साहित्यकार भविष्य दत्त भविष्य ने व्याकरणीय समस्याओं का समाधान और शब्दों के मानकीकृत रूप बताए। समापन सत्र में संयोजक दिनेश प्रजापति ने भाषा संरक्षण के लिए शिक्षक, छात्र, युवा और समुदायों को जोड़ने की योजना का उल्लेख किया। आभार साहित्यकार प्रदीप सिंह चौहान ने व्यक्त किया।


