आरजीएसएच (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) घोटाले में सोमवार को भरतपुर-डीग जिले के 13 डॉक्टर्स को जयपुर बुलाकर पूछताछ की गई। 13 डॉक्टर्स से राशा (राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी) की प्रोजेक्ट डायरेक्टर निधि पटेल ने पूछताछ की। इन डॉक्टर्स ने पुलिसकर्मियों को दवाओं की पर्चियां लिखीं थी। इस संबंध में इन 13 डॉक्टर्स की घोटाले में भूमिका पर पूछताछ के लिए बुलाया गया। भरतपुर जिले के सैटेलाइट अस्पताल के 4 डॉक्टर, आरबीएम के 6 डॉक्टर, सीएससी अवार 1 डॉक्टर और यूपीएचसी तिलक नगर का 1 डॉक्टर शामिल हैं। इसके अलावा डीग जिले के कुम्हेर अस्पताल की 1 डॉक्टर को भी जयपुर बुलाया गया है। तीन डॉक्टर्स मार्च में करा चुके हैं फर्जीवाड़े की एफआईआर जयपुर में दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक पूछताछ की गई। एक-एक डॉक्टर को बुलाकर आरजीएचएस घोटाले मामले में पहले उनसे दवाइयों के पर्चे लिखवाए गए उसके बाद कशिश मेडिकल से उठाई जिन पर्चों पर घोटाले किए उनसे राइटिंग मैच कराई।
जिन डॉक्टर्स की राइटिंग मैच नहीं हुई उनसे पूछताछ कर उन डॉक्टर्स की सूची अलग से तैयार की। आरबीएम के डॉक्टर अरुण दुबे ने बताया कि 19 दिसंबर को सभी को पत्र मिला था कि आरजीएचएस मामले में जयपुर बयान के लिए बुलाया गया है। जहां हमें हमारे नाम से हस्ताक्षर वाले दवाइयों के पर्चे,मोहर को दिखाया गया,लेकिन इस संदर्भ में 12 मार्च 2025 में ही मथुरा गेट थाने में एफआईआर कराई थी कि हमारी फर्जी मोहर, फर्जी हस्ताक्षर द्वारा आरजीएचएस में हुए भुगतान में उपयोग किया जा रहा है। इसलिए दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की गई थी। इस मामले में आरबीएम के डॉ. धीरज, डॉ विनीता ने भी साथ में ही शिकायत की थी। जिसको देखने के बाद मुझे क्लीन चिट दे दी गई। डॉ. राजवीर बताते हैं कि कुछ डॉक्टर्स ऐसे भी थे, जिनको यह भी नहीं पता था कि उनके द्वारा लिखे गए दवाइयों के पर्चे में अपनी तरफ से अतिरिक्त दवा बढ़ा कर लिख दी गई। जैसे यदि डॉक्टर ने 4 दवाई पर्चे पर लिखी और उन पर्चों पर 7 दवाइयों बढ़ा कर आरजीएचएस का पैसा उठा लिया गया। राइटिंग मैच करने पर साफ हो गया कि कई डॉक्टर्स बेगुनाह है। इनसे हुई पूछताछ सैटेलाइट अस्पताल- डॉ. गौरीशंकर, डॉ. वीरेंद्र रावत, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. मीनल माथुर
आरबीएम- डॉ. अरुण दुबे, डॉ. लोकेंद्र, डॉ. विनीत, डॉ. धीरज, डॉ. राजवीर सिंह, डॉ. प्रवीण शर्मा
सीएचसी अवार: डॉ. धर्मेश
कुम्हेर अस्पताल, डीग: डॉ. प्रियंका
यूपीएचसी तिलक नगर: डॉ. हरिओम पाठक फार्मासिस्ट को बचाने का आरोप भरतपुर नर्सिंग हॉस्पिटल की डॉ. सुनीता बताती हैं कि आरजीएचएस घोटाले में हमें एक ही तथ्य से दोषी बना रहे हैं कि हमारे यहां कशिश मेडिकल स्टोर को दुकान किराए पर दे रखी थी। हमारा पक्ष कोई सुन ही नहीं रहा। जबकि हमारे यहां कशिश मेडिकल स्टोर सिर्फ वर्ष 2022 तक थी। किरायानामा 2021 का था। दुकान न खाली न करने पर काफी लंबा विवाद चला। इन सब में सबको पकड़ा गया, लेकिन पूरे मामले का मास्टरमाइंड कशिश मेडिकल का फॉर्मासिस्ट राकेश सिकरवार पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।


