नेहरू पार्क स्विमिंग पूल अब तैराकी की सुविधा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का प्रतीक बनता जा रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद बदहाल हालत और बार-बार मरम्मत ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी जनहित के मुद्दे को उठाने के लिए शुक्रवार को जिला कांग्रेस सेवादल ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सेवादल ने मांग की कि नेहरू पार्क स्विमिंग पूल पर हुए प्रत्येक खर्च की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और जनता के पैसों का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता स्विमिंग पूल में उतरे और नकली नोटों से “स्नान” कर नगर निगम पर तंज कसा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस पूल में आम नागरिक प्रवेश शुल्क के कारण जाने से हिचकता है, उसी पूल में करोड़ों रुपए की सरकारी राशि बिना जवाबदेही के बहा दी गई। उनका आरोप है कि यह स्विमिंग पूल अब सुविधा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का शो-पीस बन चुका है। कांग्रेस नेता विवेक खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम ने स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर को “स्कैम सिटी मॉडल” बना दिया है, जहां ठेकेदारों और अधिकारियों को फायदा मिल रहा है, जबकि जनता को जर्जर सुविधाएं और टूटती टाइलें मिल रही हैं। शैलू सेन और गिरीश जोशी ने भी नगर निगम पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह प्रदर्शन प्रशासन को आईना दिखाने के लिए किया गया है, ताकि जनता जान सके कि उसका टैक्स विकास में नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार में खर्च हो रहा है। यह है पूरा मामला नेहरू पार्क स्विमिंग पूल का रिनोवेशन करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। यह काम लगभग एक साल से चल रहा था, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि न तो नगर निगम के इंजीनियरों ने नियमित निरीक्षण किया और न ही ठेकेदार ने गुणवत्ता पर ध्यान दिया। उद्घाटन से करीब 20 दिन पहले जब अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचे, तब गंभीर खामियां सामने आईं। नियमों के अनुसार टाइल्स लगाने और केमिकल प्रक्रिया के बाद स्विमिंग पूल में कम से कम 7 दिन तक पानी भरकर रखना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पानी नहीं भरने के कारण टाइल्स फूल गईं और पूरा काम खराब हो गया। अब दोबारा सुधार कार्य कराया जा रहा है। गौरतलब है कि नेहरू पार्क स्विमिंग पूल का उद्घाटन 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर प्रस्तावित था, लेकिन खामियों के चलते इसे टालना पड़ा। 7 साल पहले भी हुआ था रिनोवेशन इससे पहले करीब 7 साल पहले तत्कालीन सभापति अजय सिंह नरुका के कार्यकाल में 35×15 मीटर के इस स्विमिंग पूल का 65 लाख रुपए की लागत से रिनोवेशन कराया गया था। उस समय चार महीने में काम पूरा किया गया था और पूल को इंटरनेशनल स्तर का बनाने का प्रयास किया गया था। हालांकि पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित नहीं किया जा सका। इसके बाद पीपल्याहाना में अलग से इंटरनेशनल लेवल का स्विमिंग पूल बनाया गया।


