प्रदेश में अरावली को बचाने के लिए कोटा में भी पर्यावरण प्रेमी एकजुट होने लगे हैं। हाड़ौती पर्यावरण संरक्षण समिति व चंबल बचाओ अभियान समिति के बैनर तले आज पर्यावरण प्रेमियों ने बैठक की। पर्यावरण प्रेमियों का कहना था कि सरकार को अपना निर्णय वापस लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट को भी जनता की भावनाओं को समझना होगा। वरना राजस्थान रेगिस्तान में तब्दील हो जाएगा। बैठक में किसान नेता दशरथ कुमार, श्याम मनोहर हरित, प्रमोद चतुर्वेदी,अरुण भार्गव, मंजूर तंवर, हेमंत झाला, महेंद्र गुर्जर सहित कई पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे। अरावली से छेड़छाड़ की गई तो कोटा में बड़ा आंदोलन होगा चंबल बचाओ अभियान के संयोजक कुंदन चीता ने कहा कि आज किशोर सागर तालाब पर पर्यावरण प्रेमियों के साथ बैठक कर आंदोलन की रणनीति को लेकर चर्चा की है। सभी ने एक स्वर में कहा कि अगर अरावली के साथ छेड़छाड़ की गई तो कोटा की धरती पर बड़ा आंदोलन होगा। जल्द ही इस मामले को लेकर संभागीय आयुक्त को ज्ञापन देंगे। कुंदन चीता ने कहा कि कोर्ट के फैसले से लगता है पूरी अरावली उजाड़ दी जाएगी। करीब 250 करोड़ साल पुरानी,जब इंसान भी पैदा नहीं हुआ होगा, उस समय से अरावली संरक्षित है। अरावली को उजाड़ेंगे तो इसका असर क्या होगा? ये सब बड़े बड़े उद्योगपतियों को राहत पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। सरकार उद्योगपतियों को जमीन देना चाहती है और पर्यावरण को नष्ट करना चाहती है। सरकार को निर्णय वापस लेना पड़ेगा।कोर्ट को भी जनता की भावनाओं को समझना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट से फैसले को बदलने की मांग हाड़ौती पर्यावरण संरक्षण समिति से जुड़े श्याम मनोहर हरित ने कहा कि अरावली पर्वतमाला दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र ,हाड़ौती संभाग के कोटा बूंदी,बारां झालावाड़ क्षेत्र से जुड़ी हुई है। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सारे पर्यावरणविद चिंतित हैं। क्योंकि आने वाले समय में सरकार इसको खनन के लिए खोलने जा रही है। यदि ऐसा किया जाता है तो राजस्थान की लाइफ लाइन कही जाने वाली अरावली पर्वत श्रृंखला समाप्त हो जाएगी। और राजस्थान रेगिस्तान में बदल जाएगा। हमारी मांग है अरावली पर्वतमाला का संरक्षण व बचाव करें। हमनें सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रपति को याचिका पत्र लिखा है। और फैसले को बदलने की मांग की है।


