शासकीय एमजेएस महाविद्यालय की जमीन शिक्षा विभाग को सौंपने और उस पर शैक्षणिक सुविधाओं के विकास की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। छात्रों द्वारा तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन के बावजूद जब कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो छात्र नेता विपिन यादव उर्फ सोनू यादव ने ग्वालियर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। छात्रों ने किया था विरोध
एमजेएस कॉलेज भिंड की जमीन को शिक्षा विभाग को दिए जाने और वहां शैक्षणिक ढांचा विकसित किए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। 26 सितंबर 2025 को विपिन यादव उर्फ सोनू यादव के नेतृत्व में छात्र–छात्राओं ने कॉलेज परिसर में तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों का कहना है कि प्रस्तावित जमीन पर बीएड और एग्रीकल्चर जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं। इसके साथ ही छात्र–छात्राओं के लिए छात्रावास, ऑडिटोरियम तथा इनडोर और आउटडोर खेल परिसर जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाना जरूरी है। छात्रों का तर्क है कि इन सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता है, जिससे उन पर समय और आर्थिक बोझ बढ़ता है। तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन के बाद भी जब कॉलेज प्रशासन, उच्च शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई, तो छात्र नेता ने मजबूर होकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सरकार और अफसरों का हाईकोर्ट का नोटिस
याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार मध्यप्रदेश, एमजेएस कॉलेज भिंड के प्राचार्य, चंबल संभाग आयुक्त, उच्च शिक्षा आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। छात्रों को उम्मीद है कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कॉलेज के विकास से जुड़े इस अहम मुद्दे पर जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक फैसला सामने आएगा।


