पर्यावरण प्रेम की ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलेगी। लेकिन 83 साल के बुजुर्ग कांग्रेस नेता हेमचंद जैन के जज्बे और मेहनत का परिणाम ही है कि यहां के विपरीत वातावरण में भी दक्षिण भारत (श्रवणबेलगोला) में पाया जाने वाला नारियल का पेड़ यहां भी फल दे रहा है। इतना ही नहीं पर्यावरण के प्रति उनका प्रेम अनूठा और निराला है। इस पेड़ की खातिर ही जैन ने अपने घर को दो हिस्सों में बांटकर बनाया है। कोरोना काल में जब नारियल पानी लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रहा था और नारियल के दाम आसमान छू रहे थे तो जैन ने अपने परिचितों को फ्री नारियल भी उपलब्ध कराए। कीमती पेड़ों को काटने वाले उनके एक पेड़ उगाने की खातिर किए गए प्रयास को देखकर शायद कुछ सीख ले सकें। अगर आपको भी उनके इस अनूठे प्रयास को देखना है तो ज्यादा दूर नहीं जाना होगा। आप मोतीनगर वार्ड में माता मढ़िया से बाहुवली कालोनी की ओर जाने वाले मार्ग पर बाएं तरफ गली में बने उनके आवास पर जाकर देख सकते हैं। गली के अंदर उनके निवास को देखकर आपको थोड़ी हैरत होगी। प्रवेश द्वार से अंदर पहुंचते ही बड़ा सा आंगन है जिसमें नारियल का विशाल पेड़ खड़ा है। आंगन के दोनों तरफ उनके निवास के कमरे बने हुए हैं। निवास की दोनों छत पर जाकर थोड़ा और ऊंचाई पर प्रयास कर आप नारियल भी तोड़ सकते हैं। हेमचंद जैन बताते हैं कि 2011 में वे अपने मित्रों के साथ दक्षिण भारत गए थे। वहां से नारियल के चार पौधे लाए थे। एक पौधा खराब हो गया था, दो पौधे उन्होंने परिचितों को बांट दिए थे। एक पौधा अपने आंगन में रोपा था। तब परिजन और जानकार लोगों ने कहा था कि यह पौधा अपने यहां की भूमि में नहीं उगता काहे परेशान हो रहे हैं। तब मैंने कहा था कि प्रयास करके देखते हैं। रोपने के बाद इसमें देसी खाद और पानी देते रहे। धीरे धीरे पौधा बड़ा होने लगा। जब पेड़ बन गया तो मुझे बेहद खुशी हुई। इसके कुछ दिन बाद ही मकान के दूसरे हिस्से का निर्माण कराने का परिवार ने फैसला किया लेकिन मैंने कहा कि पेड़ मत काटना। दूसरी ओर कमरों का निर्माण करा लो। परिवार में थोड़ी जद्दोजहद के बाद सभी सहमत हो गए। इसीलिए पेड़ आज भी खड़ा है। कोरोना काल में परिवार के काम आया कोरोना काल में नारियल पानी की मांग सबसे ज्यादा थी। हेमचंद जैन ने बताया कि कोरोना काल में इसी पेड़ के नारियल का पानी परिवार के भी काम आया और हम लोगों ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को भी यह उपलब्ध कराए। नारियल पानी चूंकि सबसे बड़ा इम्युनिटी बूस्टर होता है सो उस समय मांग बढ़ने से शहर में उपलब्धता कम थी और दाम भी ज्यादा थे। जरूरत की चीज उपलब्ध कराने से मन को संतोष भी रहा।


