बड़वानी नगरपालिका बैठक, टैक्स बढ़ोतरी, उद्यान का नाम बदलने प्रस्ताव:विपक्ष ने जल, संपत्ति कर बढ़ाने और गार्डन नाम बदलने पर जताई आपत्ति

बड़वानी नगर पालिका परिषद की मंगलवार को आयोजित बैठक हंगामेदार रही। देर शाम तक चली इस बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई, लेकिन जल कर, संपत्ति कर और उद्यानों के नाम बदलने जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बैठक का सबसे विवादित मुद्दा नगर पालिका के टैक्स में की गई वृद्धि रहा। नेता-प्रतिपक्ष राकेशसिंह जाधव ने जल कर और संपत्ति कर में की गई बढ़ोतरी को ‘अनावश्यक’ बताते हुए कहा कि जनता पर डेढ़ से दो गुना बोझ डालना पूरी तरह गलत है। विपक्ष का तर्क था कि यदि शासन ने नगर पालिका के फंड में कटौती कर रहा है, तो उसका खामियाजा शहर की जनता क्यों भुगते? उन्होंने कहा कि सुविधाओं के नाम पर जनता की जेब काटना न्यायसंगत नहीं है। नाम बदलने की राजनीति: ‘मिर्ची मोहल्ला गार्डन’ बना ‘लवकुश उद्यान’ बैठक में वार्ड 19 स्थित मिर्ची मोहल्ले के गार्डन का नाम बदलकर ‘लवकुश उद्यान’ रखने का प्रस्ताव भी रखा गया। नगर पालिका अध्यक्ष अश्विनी निक्कु चौहान ने बताया कि कुशवाह समाज की मांग और आवेदन पर यह प्रस्ताव लाया गया है। हालांकि, विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर पालिका का ध्यान बगीचों के नाम बदलने के बजाय शहर की वास्तविक समस्याओं जैसे पार्किंग, यातायात और ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने पर होना चाहिए। अध्यक्ष का बचाव: “बिजली बिल भरने के लिए आय बढ़ाना जरूरी” नगर पालिका अध्यक्ष अश्विनी निक्कु चौहान ने करों में वृद्धि का बचाव करते हुए व्यावहारिक कारण बताए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में पानी की सप्लाई करने वाले इंटेकवेल का बिजली बिल ही हर महीने 30 से 40 लाख रुपए आता है। नगर पालिका की आर्थिक स्थिति को सुधारने, बिजली बिलों का भुगतान करने और विकास कार्यों के लिए धन जुटाने हेतु जल कर और राजस्व कर में वृद्धि करना अनिवार्य हो गया है। बैठक में इस प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सहमति जताई। जनता की सुविधा बनाम राजस्व का संकट विपक्ष ने साफ कर दिया कि वे जनता पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार देने के पक्ष में नहीं हैं। विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका शहर के बुनियादी मुद्दों से भटक कर केवल प्रतीकात्मक कार्यों में जुटी है। बैठक में कुछ अन्य विकास कार्यों पर तो सर्वसम्मति बनी, लेकिन टैक्स और नाम परिवर्तन के मुद्दों पर असहमति के कारण माहौल गर्माया रहा। फिलहाल, यह देखना होगा कि इन करों को लागू करने के बाद जनता की क्या प्रतिक्रिया रहती है।

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