मकर संक्रांति के साथ ही एक महीने का मलमास समाप्त हो जाएगा। 14 जनवरी 2025 को सुबह 8:56 बजे सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तब से सभी शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। ज्योतिष एवं वास्तुविद् आचार्य प्रदीप दवे के अनुसार, मलमास की शुरुआत 15 दिसंबर 2024 को रात 10:11 बजे से हुई थी। मकर संक्रांति के दिन से शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे। मकर संक्रांति का पर्व भारत में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। गुजरात में उत्तरायण, उत्तर प्रदेश में खिचड़ी, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में लोहड़ी, सिंधी समाज में लाल लोही, असम में बिहू और दक्षिण भारत में पोंगल के रूप में इसे मनाते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होते ही प्राण त्यागे थे और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। सूर्य का मकर राशि में भ्रमण 14 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक रहेगा। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने और तिल खाने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य की किरणें और तिल का सेवन शरीर के रोगों को दूर करता है। इस अवसर पर तिल, तिल के व्यंजन, चावल, दाल और खिचड़ी का दान करना शुभ माना जाता है।


