मप्र के शिवपुरी जिले में धर्म परिवर्तन कराने वाले चार सरकारी कर्मचारियों समेत 5 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इनमें 3 सरकारी टीचर और एक पटवारी शामिल है। आरोपी धर्म परिवर्तन करने पर लोगों की बेटियों की शादी कराने और 25-25 हजार रुपए कैश देने का लालच देते थे। मामला बदरवास थाना क्षेत्र के घूघला और आसपास के इलाकों से जुड़ा है। यहां अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को लंबे समय से निशाना बनाया जा रहा था। अब तक 50 से ज्यादा लोगों के धर्म परिवर्तन की पुष्टि हो चुकी है। एसडीओपी संजय मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेज दिया है। शादी, नौकरी और ₹25 हजार का झांसा
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि आरोपी संगठित तरीके से धर्मांतरण करा रहे थे और इसका नेटवर्क राज्य के बाहर तक फैला हुआ है। आरोपी धर्म परिवर्तन के बदले लोगों को बेटियों की शादी कराने, बच्चों की अच्छी शिक्षा, नौकरी दिलाने और ₹25-25 हजार नकद देने का वादा करते थे। इन्हीं झांसों में आकर बड़ी संख्या में लोग धर्म बदलने को मजबूर हुए। सरकारी कर्मचारी थे मुख्य कड़ी
गिरफ्तार आरोपियों में पादरी अम्जी भील के साथ शिक्षक वीरेन्द्र कुमार तिर्की, शिक्षिका अनीता भगत, शिक्षिका राजपति बाई तिर्की और पटवारी सुगनचंद उर्फ सुगनशाह पैकरा शामिल हैं। इनमें तीन शिक्षक और एक पटवारी शासकीय कर्मचारी हैं, जिन्होंने अपने पद और सामाजिक प्रभाव का दुरुपयोग किया। घरों में चलती थी धर्मांतरण की बैठकें
जांच में सामने आया है कि बहादुर भील और सोमला भील के घरों में नियमित बैठकें आयोजित की जाती थीं, जहां लोगों को धर्म परिवर्तन के फायदे गिनाकर दबाव बनाया जाता था। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों की संख्या और बढ़ सकती है। छत्तीसगढ़ से जुड़े तार
आरोपियों के छत्तीसगढ़ के जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर जिलों से संपर्क सामने आए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क, फंडिंग और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। बता दें कि इससे पहले बदरवास क्षेत्र के गुढालडांग गांव में वन भूमि पर बने अवैध चर्च को प्रशासन ने हटाया था, जिससे इस इलाके में धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर पहले से आशंका जताई जा रही थी।


