केंद्रीय चुनाव आयोग ने मंगलवार को मध्य प्रदेश में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत प्रोविजनल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस ड्राफ्ट में प्रदेश के 42.74 लाख वोटर्स बाहर हो गए हैं। इनमें से अधिकांश के नाम हटना तय माना जा रहा है। यानी प्रदेश के हर 13वें वोटर का नाम हट जाएगा। ड्राफ्ट से बाहर हुए नामों में मृत, दर्ज पते पर नहीं रहने वाले, स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो चुके व वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट एंट्री वाले मतदाता हैं। लिस्ट में एक अहम तथ्य यह भी है कि महिलाओं के नाम पुरुषों के मुकाबले ज्यादा कटे हैं। यह अंतर इशारा करता है कि पता बदलने, दस्तावेज अपडेट न होने और शहरी इलाकों में सामूहिक कटौती का असर महिलाओं पर ज्यादा पड़ा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, प्रदेश में 8 लाख 65 हजार 832 अनमैप्ड मतदाता हैं। इनमें वे मतदाता हैं, जिनसे आयोग अब तक संपर्क नहीं कर पाया है या जिनका डेटा 2003 की एसआईआर सूची से मिलान नहीं हो सका। ऐसे सभी मतदाताओं को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस मिलने के बाद उन्हें 7 दिन के भीतर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) के सामने उपस्थित होकर जवाब देना होगा। सबसे पहले 4 बिंदुओं में जानें इसकी सबसे बड़ी बातें 42.74 लाख वोटर बाहर…
प्रदेश के 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं में से 42 लाख 74 हजार 160 नाम शामिल नहीं हो सके, यानी कुल 7.45% वोटर्स प्रोविजनल लिस्ट से बाहर हैं। 23.64 लाख महिलाएं बाहर
ड्राफ्ट से बाहर मतदाताओं में 23 लाख 64 हजार 531 महिलाएं हैं। पुरुषों की संख्या 19 लाख 9 हजार 315 है। यानी पुरुषों की तुलना में 4,55,216 अधिक महिलाएं बाहर हुईं। 8.65 लाख वोटर्स का पता नहीं
चुनाव आयोग को 8 लाख 65 हजार 832 ऐसे मतदाता मिले, जिनसे संपर्क नहीं हो सका या जिनका डेटा 2003 की SIR सूची से मेल नहीं खा पाया; इन्हें ‘नो-मैपिंग वोटर’ माना गया है। इंदौर-भोपाल ज्यादा प्रभावित भास्कर एक्सप्लेनर 1. ड्राफ्ट लिस्ट में नाम कैसे देखें?
– भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in पर या बीएलओ/मतदान केंद्र पर लगी सूची में देखें। 2. नाम 2003 में था, अब नहीं, क्या करें?
– घबराएं नहीं। मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा के अनुसार, इस ड्राफ्ट लिस्ट पर 23 दिसंबर से 22 जनवरी 2026 तक दावे व आपत्तियां कर सकते हैं। जिन वोटर के नाम किसी कारण से छूट गए हैं, वे नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन सही पाए जाने पर नाम जोड़ दिए जाएंगे। जिनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं, उन्हें सिर्फ एक स्थान पर रखा जाएगा।
– ऐसे मतदाता जो 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। 3. अब बीएलओ की क्या भूमिका है?
– बीएलओ दावे-आपत्तियों में मदद करेगा। दस्तावेज जांच और जरूरत पड़ने पर घर जाकर सत्यापन करेगा। 4. नाम जुड़वाने के लिए दस्तावेज?
– आधार, राशन कार्ड, बिजली-पानी बिल, बैंक पासबुक, जन्म प्रमाण पत्र। 5. एक पते पर 100 से ज्यादा नाम हों तो?
– जांच होगी। गलत नाम हटेंगे। नई लिस्ट में गड़बड़ियां ही गड़बड़ियां भोपाल में 11 वार्डों के नाम, 2 लाख वोटरों के बूथ बदल दिए भोपाल में एसआईआर के तहत मंगलवार को जारी की गई नई मतदाता सूची सामने आते ही विवादों में आ गई है। भोपाल में पहले करीब 21 लाख से ज्यादा वोटर्स दर्ज थे, पर एसआईआर के बाद जारी नई सूची में 4 लाख से ज्यादा नाम काट दिए गए हैं। इसके बावजूद डुप्लीकेट वोटर, मृत मतदाताओं के नाम व गलत मैपिंग हुई हैं। कई पोलिंग बूथों पर अचानक 200 से 250 नए वोटर जोड़ दिए गए, जिनमें कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी है। कई मतदाताओं के नाम एक से ज्यादा पोलिंग बूथों पर दर्ज पाए गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी वार्डों के नाम बदलने से हो रही है। उत्तर विधानसभा क्षेत्र में कई वार्डों के नाम बदल दिए गए हैं, जिससे मतदाता भ्रमित हैं। इधर, जिला प्रशासन का कहना है कि वोटर लिस्ट अभी अंतिम नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि जब तीन-तीन बार बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे कर चुके हैं, तो फिर इतनी बड़ी गड़बड़ियां कैसे रह गईं? पुरानी वोटर लिस्ट में भोपाल के 21 लाख से ज्यादा वोटर 2029 पोलिंग बूथों पर दर्ज थे। अब बूथों की संख्या बढ़ाकर 2289 कर दी गई है। यानी 260 नए बूथ बना दिए गए। इससे करीब 2 लाख वोटरों के पोलिंग बूथ बदल गए हैं। बड़ा सवाल: मैपिंग और नो-मैपिंग वोटर एक ही लिस्ट में क्यों?
एसआईआर सर्वे के बाद दावा किया गया था कि नो-मैपिंग वोटरों के नाम के आगे स्टार (*) का निशान रहेगा। ये वे वोटर हैं, जिनका रिकॉर्ड 2003 की वोटर लिस्ट से लिंक नहीं हो पाया। लेकिन जारी की गई नई वोटर लिस्ट में ऐसा कोई निशान नहीं है। इससे यह समझना मुश्किल हो गया है कि कौन सा वोटर मैपिंग में है और कौन नो-मैपिंग में। नई वोटर लिस्ट की बड़ी गड़बड़ियां
गड़बड़ी नंबर-1:
नरेला विधानसभा के एलेक्जर ग्रीन कॉलोनी में रहने वाली अंजली गुप्ता का नाम पति का नाम, उम्र और पता एक जैसा होते हुए भी दो बार दर्ज किया गया है। फर्क सिर्फ UIR नंबर का है।
गड़बड़ी नंबर-2:
दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के भीम नगर में रहने वाले बल्लू राईन की मौत हो चुकी है, फिर भी उनका नाम पोलिंग बूथ 168 में दर्ज है।
गड़बड़ी नंबर-3:
गोविंदपुरा विधानसभा के कैलाश नगर सेमरा कला पोलिंग बूथ पर पहले 650 वोटर थे, जिन्हें बीएलओ सत्यापित कर चुके थे। नई सूची में यहां अचानक 250 नए वोटर जुड़ गए, जिनके बारे में बीएलओ को भी जानकारी नहीं है।


