विजय ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से बेची ट्रस्ट की संपत्ति

हजारीबाग जिले में खास महाल भूमि से जुड़े घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पावर होल्डर विजय प्रताप सिंह के विरुद्ध मंगलवार को हजारीबाग स्थित एसीबी के विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। एसीबी ने विजय प्रताप सिंह को इस मामले में 6 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। अभी वह न्यायिक हिरासत में है। चार्जशीट में एसीबी ने कोर्ट को बताया है कि हजारीबाग की 2.75 एकड़ खास महाल भूमि वर्ष 1948 में 30 वर्षों के लिए सेवायत ट्रस्ट को लीज पर दी गई थी। यह लीज 1978 में समाप्त हो गई थी और बाद में 2008 तक इसका नवीनीकरण किया गया। इसके बावजूद 2008 से 2010 के बीच एक सुनियोजित प्रशासनिक षड्यंत्र के तहत इस भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर 23 निजी व्यक्तियों को आवंटित कर दिया गया। एसीबी के अनुसार, इस षड्यंत्र के केंद्र में तत्कालीन डीसी की भी भूमिका रही। ट्रस्ट की संपत्ति को बेचने के लिए फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल किया गया। विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह को धारक बनाया गया था। विनय के खिलाफ चार्जशीट, बेल आदेश पर कोर्ट की सख्ती हजारीबाग| सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री मामले में एसीबी ने विनय सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इस मामले में विनय चौबे सहित 68 लोग आरोपी हैं। इधर, सुप्रीम कोर्ट से 19 दिसंबर को जमानत मिलने के बावजूद एसीबी द्वारा विनय सिंह को पूछताछ के लिए रांची ले जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। वहीं, कोर्ट ने उनकी प|ी स्निग्धा सिंह के खिलाफ वारंट जारी करने से इंकार कर दिया। हजारीबाग जमीन घोटाला एफआईआर में विनय चौबे समेत 8 आरोपी एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर में निलंबित आईएएस विनय चौबे, तत्कालीन खास महाल पदाधिकारी विनोद चंद्र झा, बसंती सेट्ठी, उमा सेट्ठी, इंद्रजीत सेट्ठी, राजेश सेट्ठी, विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया है। यह पूरा मामला उस समय का है, जब हजारीबाग के डीसी विनय कुमार चौबे थे।

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