कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हुए हालिया घटनाक्रम के विरोध में सर्व समाज ने 24 दिसंबर, बुधवार को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है। समाज ने संविधान की पांचवीं अनुसूची, ग्राम सभा की सर्वोच्चता और जनजातीय परंपराओं के उल्लंघन का आरोप लगाया है। टिकरापारा स्थित राम मंदिर परिसर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में सर्व समाज के पदाधिकारियों और प्रमुखों ने इस घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। इस दौरान मनोज गिडिया, मोतीलाल यादव, डॉ. साधना अग्रवाल, कमलेश रंगलानी और टी.डी. वर्मा सहित कई सदस्य उपस्थित थे। सर्व समाज के प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह ने बताया कि विवाद 15 दिसंबर को बड़ेतेवड़ा गांव निवासी चमरा राम सलाम की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर शुरू हुआ। 16 दिसंबर की सुबह ग्राम समाज के परंपरागत पदाधिकारियों की उपस्थिति में चर्चा चल रही थी। इसी दौरान ग्राम सभा की अनुमति के बिना बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी का आरोप लगा। ग्रामीणों के अनुसार, श्मशान स्थल जनजातीय पेन-पुरखा परंपरा के तहत संचालित होता है और अंतिम संस्कार उसी रीति से होना चाहिए था। हालांकि, निजी भूमि में अलग रीति से दफन करने की घोषणा के बाद तनाव बढ़ गया। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी और समझाइश के बावजूद निजी भूमि में दफन की प्रक्रिया की गई। इसे ग्राम सभा के अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। इसके बाद प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीणों के आवेदन स्वीकार न करने के आरोप भी लगे। 17 दिसंबर को कथित तौर पर कब्र स्थल पर निर्माण कार्य शुरू किया गया और बाहरी लोगों द्वारा ग्रामीणों पर हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हुए। 18 दिसंबर को स्थिति और बिगड़ने पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हुई, जिसके बाद शव को हटाया गया। इस दौरान बल प्रयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सर्व समाज ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी मांग की है। समाज ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित छत्तीसगढ़ बंद शांतिपूर्ण रहेगा। यह बंद जनजातीय आस्था और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा है।


