मुरैना जिले की कैलारस तहसील में सरकारी स्कूल और अस्पताल दबंगों का ‘तबेला’ बनकर रह गए थे। यहां कक्षाओं के बाहर बच्चों के खेलने की जगह पर दबंगों ने अपनी भैंसें और अन्य मवेशी बांध रखे थे। पूरे परिसर में गोबर के ढेर लगे थे। ग्रामीणों की शिकायत के बाद मंगलवार को प्रशासन का बुलडोजर चला और इन संस्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर तहसीलदार नरेश शर्मा ने जेसीबी लेकर मालिबाजना, कुरौली, नेपरी, कुटरावली और मामचोंन गांवों में कार्रवाई की। यहां सरकारी इमारतों के परिसरों से अवैध कब्जे हटाकर उन्हें वापस संस्थाओं को सौंपा गया। बदबू से मरीज परेशान, बच्चों का खेल मैदान गायब ग्रामीणों ने बताया कि दबंगों ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा था। स्कूलों में बच्चों को खेलने के लिए खुला मैदान नहीं मिलता था, क्योंकि वहां जानवर बंधे रहते थे। यही हाल उप-स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ियों का था। वहां इलाज कराने आने वाले मरीज गंदगी और गोबर की बदबू के कारण थोड़ी देर भी नहीं बैठ पाते थे। गंदगी के कारण बीमारी फैलने का खतरा भी बना हुआ था। ग्रामीणों ने दिया साथ, बोले- अब राहत मिलेगी कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने भी प्रशासनिक टीम का पूरा साथ दिया। उन्होंने बताया कि दबंगों के डर से वे कुछ बोल नहीं पाते थे, लेकिन कलेक्टर से शिकायत के बाद जब टीम पहुंची तो लोगों ने राहत की सांस ली। तहसीलदार नरेश शर्मा ने कार्रवाई के बाद कहा कि शासकीय जमीन केवल जमीन नहीं, बल्कि जनता के अधिकार और भविष्य की नींव होती है। इसे अतिक्रमण से मुक्त रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।


