इंस्पेक्टर ने लिखाई यूपी के टॉप-4 माफिया की प्रॉपर्टी:90 लाख के 10 चेक देकर पत्नी के नाम कराया; 2 साल से दुबई में हाजी इकबाल

सहारनपुर में इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने माफिया हाजी इकबाल की करीब 50 बीघा जमीन अपनी पत्नी के नाम करवा ली। इसके बदले उसने माफिया को कानूनी तौर पर मदद का भरोसा दिया। शिकायत पर जांच हुई। आरोप सही पाए गए। 11 जनवरी, 2025 को इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया गया। दो मुकदमे दर्ज हो गए। अब वो वांटेड है, पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जिस एरिया में ये बेशकीमती जमीन है, वो चार राज्यों से सटा है। तमाम अफसरों, रईसों और नेताओं ने अपनी काली कमाई यहां जमीन खरीदने में लगाई है। बर्खास्त इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने जहां जमीन खरीदी, वहां नजदीक में ही शाकंभरी रेलवे स्टेशन बनना है। ऐसे में जमीन अधिग्रहण होते ही उसका रेट चार गुना होना तय था। इधर, पांच हजार करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी कुर्क होने के बाद माफिया हाजी इकबाल पिछले करीब दो साल से दुबई में है। उसके पासपोर्ट और वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी है। भारत की सुरक्षा और जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि अब वो जल्द ही पासपोर्ट रिन्युअल के लिए भारत आएगा। दैनिक भास्कर ने सहारनपुर पहुंचकर पूरा केस समझा। बर्खास्त इंस्पेक्टर नरेश कुमार की पत्नी के नाम वाली इंदरपुर की जमीन पर पहुंचा। FIR कॉपी और जांच रिपोर्ट की स्टडी की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले बात माफिया हाजी इकबाल की खैर की लकड़ियां चुराता था, रोजाना 5 करोड़ रुपए थी कमाई
मूल रूप से बिजनौर निवासी इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने 24 फरवरी 2023 को सहारनपुर में थाना मिर्जापुर का चार्ज संभाला। नरेश कुमार यहां 13 सितंबर 2023 यानी करीब सात महीने तक इंस्पेक्टर रहा। इसी थाने का माफिया है हाजी इकबाल उर्फ बाला। ये जिले का सबसे बड़ा भूमाफिया है और प्रदेश की लिस्ट में इसका नाम चौथे नंबर पर है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार- हाजी इकबाल ने खैर की बेशकीमती लकड़ियां चुराने से अपना धंधा शुरू किया था। साल-1985 के आसपास उस पर सबसे पहला मुकदमा लकड़ी चोरी का थाना मिर्जापुर में दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने यूपी, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सटे इलाकों में यमुना नदी में खनन और पहाड़ों पर पत्थर काटने के ठेके लेने शुरू कर दिए। मायावती सरकार में वो सबसे पॉवरफुल हो गया। हाजी इकबाल और उसका भाई महमूद MLC बन गए। साल 2010-2011 में तत्कालीन मायावती सरकार ने यूपी की सात चीनी मिलों को कौड़ियों के भाव बेच दिया था। इसमें भी हाजी इकबाल का नाम सामने आया था। उसने बोली लगाकर इन चीनी मिलों को खरीदा था। इस घोटाले में ED ने केस दर्ज भी किया था। पुलिस अफसर मानते हैं कि हाजी इकबाल की एक दिन की कमाई 5 करोड़ रुपए के आसपास थी। सहारनपुर से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक वो खूब खर्चा करता था। अब हाजी इकबाल पर करीब 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इसमें जमीन कब्जाने, गैंगरेप, हमला, धोखाधड़ी जैसे मामले हैं। उस पर यूपी पुलिस ने एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया है। यूपी पुलिस अब तक इकबाल की करीब 700 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी कुर्क कर चुकी है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साल- 2024 में इकबाल के ट्रस्ट की ग्लोकल यूनिवर्सिटी और कृषि जमीनें कुर्क की थीं। इनकी कीमत करीब 4400 करोड़ रुपए है। इंस्पेक्टर ने कैसे हथियाई करोड़ों की जमीन, समझिए जिन किसानों के पास माफिया की बेनामी संपत्ति, उन्हें धमकाकर जमीन नाम कराई
हाजी इकबाल ने कानूनी शिकंजे से बचने के लिए अपनी तमाम बेनामी संपत्तियां स्थानीय लोगों के नाम कर दीं। इन्हीं में से एक है रोशनलाल, जो सहारनपुर में मिर्जापुर थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरपुर का रहने वाला है। दलित रोशनलाल कहने को एकदम गरीब है, लेकिन कागजों में अमीर है। मिर्जापुर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर नरेश कुमार को जानकारी हुई कि माफिया हाजी इकबाल की कुछ जमीनें रोशनलाल के पास हैं। इंस्पेक्टर ने उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। दो दिन तक थाने में बैठाए रखा। जेल भेजने की धमकी दी। जून-जुलाई 2023 में इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने रोशनलाल से 24 बीघा जमीन अपनी पत्नी राजरानी के नाम करा ली। ये जमीन पहाड़ी एरिया से सटे गांव इंदरपुर में है। इसी तरह इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने धमकाकर गांव फैजाबाद के लाल सिंह से 9.5 बीघा और श्रवण कुमार से 16 बीघा जमीन अपनी पत्नी के नाम कराई। जून-जुलाई 2023 में इन तीनों जमीनों के बैनामे हुए। फैजाबाद वाली जमीन के पास ही शाकंभरी रेलवे स्टेशन बनना प्रस्तावित है। इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने ही 15 बीघा जमीन देहरादून निवासी विजय कुमार के नाम भी कराई। माना जा रहा है कि ये विजय भी इंस्पेक्टर का बेहद करीबी है। रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए इंस्पेक्टर ने तीन बेनामी संपत्तियों के सर्किल रेट के 91 लाख रुपए के 10 चेक रोशनलाल को दिए। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बिजनौर के मैनेजर ने पुलिस को बताया है कि आज तक इन चेकों का भुगतान नहीं हुआ है। पुलिस अफसर मान रहे हैं कि इंस्पेक्टर ने सिर्फ कागजी रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए रोशनलाल को चेक जरूर दिए, लेकिन उन्हें कैश नहीं करने के लिए भी कहा। कैसे खुला ये पूरा खेल? माफिया की बीवी ने CM योगी को भेजी थी चिट्ठी
माफिया हाजी इकबाल की पत्नी ने साल-2023 में मुख्यमंत्री को एक लेटर भेजा कि हमारी करोड़ों रुपए की संपत्तियों को गैर कानूनी ढंग से बेचा जा रहा है। इसमें एक नाम मिर्जापुर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर नरेश कुमार का भी था। सहारनपुर रेंज के DIG अजय कुमार साहनी ने दैनिक भास्कर को बताया- तत्कालीन एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक ने इस केस की प्रारंभिक जांच की। इसमें पाया गया कि इंस्पेक्टर ने जमीन खरीदी है। इसके बाद केस की विभागीय विस्तृत जांच एसपी देहात सागर जैन ने की। दोनों जांच में पता चला कि इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने कानूनी तौर पर मदद करने के नाम पर माफिया हाजी इकबाल की करीब 50 बीघा जमीन अपनी पत्नी के नाम करा ली और उसका भुगतान भी नहीं किया। 17 अक्टूबर 2024 को सदर बाजार थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने इंस्पेक्टर नरेश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज कराया। वहीं, 18 अक्टूबर 2024 को रोशनलाल ने मिर्जापुर थाने में FIR कराई कि 24 बीघा जमीन का बैनामा इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने जबरन कराया था। इस मुकदमे में नरेश कुमार की पत्नी राजरानी भी नामजद हैं। चार राज्यों से सटा है सहारनपुर का मिर्जापुर, धन्नासेठों ने बनाए फार्म हाउस
सहारनपुर का मिर्जापुर एरिया चार राज्यों से सटा है। यूपी के अलावा उत्तराखंड के देहरादून, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और हरियाणा के यमुनानगर की सीमाएं मिर्जापुर से लगती हैं। ये पूरा इलाका पहाड़ी है। यहां यमुना नदी बहती है, जहां बड़े पैमाने पर खनन होता रहा है। इसके अलावा पहाड़ काटने (स्टोन क्रशर) के ठेके भी छूटते हैं। प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां शाकुंभरी देवी मंदिर भी इसी क्षेत्र में है। मिर्जापुर एरिया में तमाम धन्नासेठों ने खेतों और खादर की जमीन (नदी के पास निचले इलाके की जमीन) लेकर बड़े-बड़े फार्म हाउस और बाग बनाए हुए हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जो विदेश में रह रहे, लेकिन उनकी जमीनें मिर्जापुर क्षेत्र में हैं। दैनिक भास्कर की टीम बर्खास्त इंस्पेक्टर नरेश कुमार की इंदरपुर गांव वाली जमीन पर पहुंचा। यहां बाग है और ऊंचे-ऊंचे पेड़ खड़े हैं। चारों तरफ तारबंदी हुई है। इस जमीन से कुछ दूरी पर नदी बहती है और पहाड़ हैं। इसके सामने ही एक आलीशान फार्म हाउस है। जमीन तक पहुंचने के लिए सेपरेट रास्ता बना हुआ है। बड़े लोग यहां जमीनें क्यों खरीदते हैं?
हमने ये सवाल यहां के एक टॉप ब्यूरोक्रेट से पूछा। उन्होंने बताया- बड़े लोग सुकून पाने के लिए पहाड़ी क्षेत्र का रूख करते हैं। जब ज्यादा पैसा हो जाता है तो वो वहां जमीन भी खरीद लेते हैं। मिर्जापुर के जमीन माफियाओं ने उन्हीं धन्नासेठों को सुकून वाले सब्जबाग दिखाए। इस तरह यहां प्रॉपर्टी के रेट बढ़ते गए। मौजूदा वक्त में 70 लाख रुपए बीघा तक खेती की जमीन बिक रही है। इनपुट सहयोगी : अमित गुप्ता ———————— ये खबर भी पढ़ें… सहारनपुर में इंस्पेक्टर बर्खास्त,हाजी इकबाल की जमीन जबरन खरीदी थी:डीआईजी ने जांच के आदेश दिए थे, शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई सहारनपुर में डीआईजी अजय साहनी ने इंस्पेक्टर नरेश कुमार को बर्खास्त कर दिया है। नरेश कुमार पर पद के दुरपयोग करने का आरोप है। उनके खिलाफ तीन महीने पहले लखनऊ के एक युवक ने वकील के जरिए सीएम पोर्टल पर शिकायत की थी। जिसमें बताया था कि नरेश कुमार ने पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल की करोड़ों की जमीन जबरन काम दाम में अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी है। पढ़ें पूरी खबर

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