स्पेन से जैसलमेर पहुंचे गिद्ध, सख्त खाल पसंदीदा भोजन:एक्सपर्ट बोले- ये थार का काला शहंशाह, इनके आगे इंफेक्शन भी नहीं टिकता

जैसलमेर के प्रसिद्ध देगराय ओरण में इन दिनों विदेशी मेहमानों का जमावड़ा लगा है। मध्य एशिया और यूरोप के बर्फीले इलाकों से हजारों मील का सफर तय कर दुनिया के सबसे विशालकाय पक्षियों में शुमार सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture) और यूरेशियन ग्रिफन गिद्ध (Eurasian Griffon Vulture) के झुंड ने यहां दस्तक दी है। विगत कई वर्षों से ओरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए समर्पित स्थानीय पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह सांवता ने इन दुर्लभ पक्षियों की गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद किया है। उन्होंने बताया कि इस बार ओरण के आसमान में इन दोनों प्रजातियों का एक साथ दिखना जैव-विविधता के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि है। हजारों मील का जोखिम भरा सफर ये मुख्य रूप से स्पेन, दक्षिण यूरोप, तिब्बत, मंगोलिया और कजाकिस्तान से उड़कर आते हैं। जब वहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और बर्फ की चादर बिछने से भोजन मिलना बंद हो जाता है, तो ये दक्षिण की ओर रुख करते हैं। पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह सांवता ने बताया कि देगराय ओरण इन पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना इसलिए है यहां का इको सिस्टम अभी भी शुद्ध है। यहां हजारों की संख्या में पशुधन है। प्राकृतिक रूप से मरने वाले जानवरों के शव इन गिद्धों के लिए ‘बफर स्टॉक’ का काम करते हैं। इसके अलावा, यहां मौजूद ऊंचे खेजड़ी और कुमठ के पेड़ इनके सुरक्षित विश्राम के लिए उपयुक्त हैं। कुदरत के ‘बायो-वेस्ट मैनेजर’ सुमेर सिंह ने बताया कि ये प्राकृतिक सफाई करते हैं। गिद्ध मरे हुए जानवरों को खाकर उन्हें सड़ने से बचाते हैं। यदि ये मरे हुए मवेशी खुले में सड़ें, तो इनसे एंथ्रेक्स, रेबीज, ब्रुसेलोसिस और क्षय रोग जैसी घातक बीमारियां फैल सकती हैं। सुमेर सिंह ने बताया- गिद्धों के पेट में मौजूद ‘गैस्ट्रिक एसिड’ इतना शक्तिशाली होता है कि वह सड़ते मांस के अंदर मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस को भी पचाकर खत्म कर देता है। ये ‘डेड-एंड’ क्लीनर हैं, यानी संक्रमण इनसे आगे नहीं बढ़ता। सिनेरियस गिद्ध: थार का काला शहंशाह सिनेरियस गिद्ध, जिसे ‘मोंक वल्चर’ या ‘ब्लैक वल्चर’ भी कहा जाता है, अपनी राजसी बनावट के लिए जाना जाता है। यूरेशियन ग्रिफन: झुंड का ‘सामाजिक’ सदस्य सिनेरियस के साथ ही यूरेशियन ग्रिफन गिद्ध का भी बड़ा झुंड यहां पहुंचा है। ये सिनेरियस से थोड़े अलग स्वभाव के होते हैं। संकट के बादल: क्यों घट रही है इनकी आबादी? इतनी उपयोगिता के बावजूद इन पक्षियों पर संकट कम नहीं है। सुमेर सिंह ने चिंता जताते हुए कुछ मुख्य खतरों की ओर इशारा किया: ओरण के प्रहरी सुमेर सिंह की अपील पिछले कई दशकों से इन पक्षियों की निगरानी कर रहे सुमेर सिंह सांवता कहते हैं- “देगराय माता का ओरण इन पक्षियों के लिए एक ‘सेफ हेवन’ है। ये हमारे पर्यावरण के साथी हैं। हमें यह समझना होगा कि यदि गिद्ध नहीं रहेंगे, तो भविष्य में महामारियों का प्रकोप बढ़ेगा। हमें ओरण की भूमि को अतिक्रमण से बचाना होगा और यहाँ की जैव-विविधता को संजोना होगा। प्रशासन को चाहिए कि वह इन प्रवासी रूटों पर बिजली की लाइनों को ‘इंसुलेट’ करे ताकि ये मेहमान सुरक्षित वापस लौट सकें।” पक्षियों का प्रोफाइल

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