हॉकी पावर गेम हो गया है, क्लब खत्म हो रहे:अर्जुन अवार्डी हॉकी प्लेयर अशोक ध्यानचंद बोले- एस्ट्रोटर्फ की ग्राउंड में जरूरत, आज ग्राउंड खिलाडिय़ों को तरस रहे

पहले जब हम हॉकी खेलते थे वह दौरा कलात्मक हॉकी का दौर था। हॉकी कलाइयों से खेली जाती थी। आज की हॉकी पावर हॉकी है कंधे से खेलते है। समय बदला है और खेलने के तरीके भी बदल गए है। लेकिन उस दौर को फिर से लाना होगा। यह बात कही हॉकी के दिग्गज प्लेयर मेजर ध्यानचंद के बेटे और ओलंपिक पदक विजेता व अर्जुन अवार्डी अशोक कुमार ध्यानचंद ने। अशोक ध्यानचंद कोटा में आयोजित हो रही संग्राम सिंह हॉकी कप में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने आए देशभर के खिलाडियों का हौसला बढ़ाया। इस दौरान बात करते हुए अशोक ने कहा कि हॉकी को बढ़ाना है तो सबसे पहले तो सरकार से यही अनुरोध है कि एस्ट्रोटर्फ यहां लगाए जाएं। कोटा में खासकर लगाएं जाए अगर यह मैदान में लगते हैं तो इसका फायदा कोटा ही नहीं बल्कि राजस्थान को होगा। अभी कोटा में ये कहीं नहीं है। एस्ट्रोटर्फ छोडिए अभी कोटा में मैदानों में हॉकी प्लेयर नजर नहीं आ रहे है। उन्होंने बताया कि कोटा में उनका काफी समय बीता है और कोटा से उन्हें हॉकी में मौके मिले हैं। कोटा में पहले अलग अलग क्लब चला करते थे। इससे मौके निकलते थे। एक साल पहले गर्वमेंट कॉलेज में गए थे लेकिन वहां पर मैदान तो है लेकिन खिलाड़ी नजर नहीं आए। हॉकी को बढ़ाना है तो टूर्नामेंट आयोजित करने होंगे, क्लब तैयार करने होंगे। मैदान तक बच्चों को लाने की जिम्मेदारी लेनी होगी
उन्होंने कहा कि छोटे छोटे बच्चे जब मैदान पर हॉकी में हुनर दिखाते हैं तो अच्छा लगता है। इन्हीं टूर्नामेंट के जरीये खिलाडी की प्रतिभा का पता लगता है और उसे देश के लिए खेलने का मौका मिलता है। आज मैदान खाली पडे़ है जो बच्चों के आने से ही गुलजार होंगे। लेकिन उन्हें यहां तक लाने के लिए भी जिम्मेदारी लेनी होगी। पहले क्लबों के जरीये, टूर्नामेंट के जरीये हॉकी खेलते थे, मैच होते थे। उसी से हम आगे बढे। हॉकी हमारी विरासत है क्योंकि विश्व में हॉकी के आठ गोल्ड, चार ब्रांज और एक सिल्वर देने वाला देश भारत ही है। इसलिए हमे हॉकी को आगे बढ़ाना है। छोटे छोटे टूर्नामेंट ही बडे खिलाडियों को पैदा करते हैं।

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