1930 के स्वतंत्रता संग्राम में बैतूल के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों पर आदिवासी कलाकारों द्वारा बनाई गई फिल्म “जंगल सत्याग्रह” का प्रीमियर शो विधानसभा के मानसरोवर सभागार में दिखाया गया। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह द्वारा दिखाई गई इस फिल्म को देखने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम, पीसी शर्मा, कमलेश्वर पटेल, विधायक जयवर्धन सिंह और नितेन्द्र सिंह राठौर पहुंचे। दिग्गी के बुलावे पर नहीं पहुंचे बीजेपी नेता दिग्विजय सिंह ने CM डॉ मोहन यादव, पूर्व सीएम उमा भारती, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर सहित बीजेपी के तमाम विधायकों और मंत्रियों को जंगल सत्याग्रह के प्रीमियर शो को देखने का न्योता दिया था। हालांकि ये सभी नहीं पहुंचे। बीजेपी नेताओं के फिल्म में न आने पर दिग्विजय सिंह ने कहा- उनकी रुचि है कश्मीर फाइल्स, केरला, साबरमती एक्सप्रेस जैसी फिल्मों में हैं, जहां हिंसा और नफरत उनका पॉलिटिकल एजेंडा है। हमारा पॉलिटिकल एजेंडा उन स्वतंत्रता सेनानियों को महिमामंडित करना है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी।” दिग्विजय बोले- फिल्म टैक्स फ्री हो, सरकार प्रमोट करें दिग्विजय सिंह ने कहा- ये कोई अनुभवी लोग नहीं थे। इन्होंने बडे़ प्रोफेशनल तरीके से अच्छी क्वालिटी की फिल्म बनाई है। एक संदेश दिया है कि किस तरह से अंग्रेजों ने इस देश को लूटा। अंग्रेजों ने हमारे जंगलों की बर्बादी की। आदिवासियों की आमदनी का जरिया छीना। हम ये पहले से मांग करते आए हैं कि इसे न केवल टैक्स फ्री किया जाए, बल्कि इसे सेंसरबोर्ड से तत्काल मंजूरी देकर प्रमोट किया जाना चाहिए। दिग्विजय बोले, मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहूंगा कि इस टीम को प्रोत्साहित करें, जो आदिवासियों के लिए ऐतिहासिक उदाहरण हैं। इसी टीम को पूरा संसाधन देकर इनसे फिल्में तैयार कराई जाएं। पटवारी बोले- देशी कलाकारों की सरकार सहायता करें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष इस फिल्म को लेकर कहा कि, मैं समझता हूं कि जो महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जो इतिहास में दर्ज नहीं हैं। उन्हीं सेनानियों के कारण हम स्वतंत्र हैं। मैं मानता हूं कि हम सबको फिल्म देखना चाहिए। फिल्म में किसी प्रकार का राजनीतिकरण छोटी और ओछी बात हो जाएगी। लेकिन, पूरे भारतवर्ष के नागरिक फिल्म देखें। क्योंकि, ये स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान होना चाहिए। पटवारी ने कहा फिल्म को टैक्स फ्री होना चाहिए। हमारे लोकल कलाकार हैं, संघर्ष में फिल्म बनी है। सरकार सहायता नहीं करेगी केवल जो बाहर के स्टार आते हैं उनके साथ फोटो खिंचवाने से अच्छा है कि अपने देशी कलाकारों का ध्यान दे। भूरिया बोले- बीजेपी का आदिवासियों से लेना-देना नहीं कांतिलाल भूरिया ने कहा- बीजेपी का तो आदिवासियों से कोई लेना देना नहीं हैं। हमारे आदिवासी कलाकारों ने जो फिल्म बनाई है, वो असली है। उस जमाने में आजादी के पहले आदिवासियों पर कैसे अत्याचार होता था। उनको कैसे प्रताड़ित करते थे वो सब इस फिल्म में दिखा है। फिल्म डायरेक्टर बोले-पीएससी एग्जाम में आया सवाल, तो बनाई फिल्म फिल्म के डायरेक्टर प्रदीप उईके ने कहा कि, मैं पीएससी का एग्जाम दे रहा था उसमें जंगल सत्याग्रह पर प्रश्न पूछा गया। उसके बाद मैंने सरदार गंजन सिंह कोरकू के बारे में पढ़ना शुरू किया। 3 साल में पूरी कहानी खोज पाया। इस फिल्म को बनाने के लिए मैंने समाज के लोगों से मदद मांगी। आदिवासियों पर बनी फिल्म के लिए एक करोड़ तक राशि जुटाने में बहुत संघर्ष करना पड़ा। प्रदीप ने दिग्विजय सिंह को आदिवासी हितैषी बताया। फिल्म पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा- ‘जंगल सत्याग्रह’ फिल्म केवल एक फिल्म नहीं है बल्कि मध्यप्रदेश के आदिवासी नायकों के अदम्य साहस, त्याग और स्वाभिमान की जीवंत गाथा है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि कैसे मध्यप्रदेश के आदिवासी नायकों ने 1930 में अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद कर अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दे दी। दिग्विजय बोले- आदिवासी डायरेक्टर ने फिल्म बनाई पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जंगल सत्याग्रह फिल्म के लेखक और डायरेक्टर प्रदीप उइके को बधाई दी। कहा कि बैतूल के एक सुशिक्षित आदिवासी डॉ. प्रदीप उइके ने जंगल सत्याग्रह पर एक फीचर फिल्म बनाई है। उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि ये पहला प्रयास है हमारे आदिवासी भाइयों का जहां उन्होंने अपने ही प्रयासों से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ही नहीं लेकिन आदिवासियों के हित में एवं उनके बलिदानी इतिहास के संबंध में उन्होंने ये फिल्म बनाई है। फिल्म में दो पूर्व विधायक ने निभाए किरदार दिग्विजय सिंह ने बताया कि फिल्म में बैतूल अंचल के क्रांतिकारी आदिवासी नायक सरदार गंजन सिंह कोरकू, सरदार विष्णु सिंह गोंड, ठाकुर मोहकम सिंह, रामजी कोरकू एवं जुगरू गोंड के अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष को दिखाया गया है। संघर्ष में गैर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी कांग्रेस नेता दीपचंद गोठी, बिहारी लाल पटेल, डॉ. शारदा प्रसाद, पुरुषोत्तम बालाजी अंबेकर की भूमिका भी अहम थी। इस फिल्म में पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे और पूर्व विधायक धरमू सिंह सिरसाम ने भी रोल निभाया है। फिल्म में रोल निभाने वाले पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा कि, फिल्म के माध्यम से हमने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में आदिवासी नायकों के योगदान को दिखाने का प्रयास किया है। विषम परिस्थितियों होने के बाद भी हमारे आदिवासी नायकों ने हथियार लेस अंग्रेजों से कड़ा मुकाबला किया। अपने प्राणों की आहुति दी। स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों नायकों के द्वारा दिए गए योगदान को प्रदर्शित करने की कोशिश की है। जल, जंगल, जमीन के आंदोलन से यह फिल्म प्रेरित है। आने वाली पीढ़ी इन नायकों से सीख ले यही हमारा प्रयास है। फिल्म बैतूल के आदिवासियों के विद्रोह पर आधारित स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक बहुचर्चित आंदोलन “जंगल सत्याग्रह” में बैतूल के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ 1930 में विद्रोह का बिगुल फूंका था। इस आंदोलन में आदिवासी नायक सरदार गंजन सिंह कोरकू, सरदार विष्णु सिंह गोंड, ठाकुर मोहकम सिंह, रामजी कोरकू और जुगरू गोंड द्वारा 1930 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जल, जंगल और जमीन के लिए किए गए संघर्ष को फिल्म में दिखाया गया है।


