चूरू में अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण की मांग को लेकर बुधवार को जनआंदोलन किया गया। शहीद भगतसिंह युवा क्रान्तिकारी मंच के देखरेख में युवाओं, किसानों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इंद्रमणि पार्क से कलेक्ट्रेट सर्किल तक शांतिपूर्ण रैली निकाली। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “अरावली बचाओ, पर्यावरण बचाओ” और “आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करो” जैसे नारे लगाए। कलेक्ट्रेट सर्किल पहुंचने के बाद, उन्होंने एसडीएम सुनील कुमार को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। संस्थान के राजेश चौधरी ने बताया कि अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की प्राचीनतम पर्वतमालाओं में से एक है। यह राजस्थान सहित उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला है। यह पर्वतमाला भू-जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जैव विविधता की रक्षा और मरुस्थलीकरण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ज्ञापन में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत अरावली की वर्तमान परिभाषा पर पुनर्विचार की मांग की गई। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि अरावली को सीमित तकनीकी या संख्यात्मक मापदंडों में बांधा गया, तो इसके बड़े भू-भाग के संरक्षण से बाहर होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि इससे अवैध खनन, वनों का क्षरण और जल संकट गहराएगा। प्रदर्शनकारियों ने अरावली पर्वतमाला को उसकी संपूर्ण भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ स्थायी संरक्षण देने और अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे को जनहित और राष्ट्रहित से जुड़ा बताया।


