अमृतसर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के गंभीर मामले को लेकर आज सिख संगठनों का गुस्सा एक बार फिर सामने आया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार समिति और विभिन्न सिख जत्थेबंदियों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर एकजुट होकर जोरदार रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस कमिश्नर के नाम डीसीपी रविंदर पाल सिंह को एक मांग पत्र सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान सिख नेताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वर्ष 2020 में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर डॉ. डॉ. ईश्वर सिंह की देखरेख में इस मामले की जांच करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के लापता होने की पुष्टि की गई थी, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी भी दोषी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। मोर्चे पर लाठीचार्ज, दस्तारों की बेअदबी, कई घायल नेताओं ने बताया कि इस मामले को लेकर भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल, भाई तरलोचन सिंह सोहल, भाई सरूप सिंह और भाई निशान सिंह सियालका सहित कई सिख नेताओं ने तेजा सिंह समुद्री हॉल के सामने लंबे समय तक शांतिपूर्ण मोर्चा लगाया था। आरोप है कि मोर्चे के 41वें दिन शिरोमणि कमेटी की टास्क फोर्स ने प्रदर्शन कर रहे सिखों पर बल प्रयोग किया, उनकी दस्तारों की बेअदबी की गई और कई सिख गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित सिखों पर ही झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए, जिनमें एफआईआर नंबर 177 और 296 शामिल हैं। सिख संगठनों ने कहा कि माननीय हाईकोर्ट के आदेशों के बाद करीब पांच साल बाद मामला दर्ज हुआ, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। संगठनों ने मांग की कि निर्दोष सिख नेताओं पर दर्ज झूठे केस तुरंत रद्द किए जाएं और दोषियों को आईपीसी की धारा 307, 326 और 325 के तहत तुरंत गिरफ्तार किया जाए। सिख नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस की ढीली कार्रवाई जारी रही, तो शहीदी दिवसों की समाप्ति के बाद बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष जारी रहेगा।


