गुड सेमेरिटन को लेकर जागरूकता की कमी, सड़क हादसे के बाद एंबुलेंस के इंतजार में चली जाती है जख्मी की जान

प्रकाश​ मिश्रा गिरिडीह जिले की सड़कों पर हादसे हो जाने के बाद रास्ते से गुजर रहे लोगों की भीड़ लग जाती है, लेकिन उन्हें अस्पताल पहंुचाकर इलाज करवाने की जोखिम कोई नहीं उठाना चाहता है। वहीं लोग अस्पताल ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस का इंतजार करते हैं। जिस वजह से सड़क हादसे में शिकार व्यक्ति के पास बचा हुआ गोल्डन आवर खत्म हो जाता है और उसकी मौत हो जाती है। जबकि सड़क हादसे में गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने वाले आम लोगों को पहचान करते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से उसे गुड सेमेरिटन के तहत पुरस्कृत भी किया जाता है, लेकिन आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि तीन वर्षों में जिले में बगोदर और सेमेरिटन प्रखंड में हुए सड़क हादसे मंे 14 लोगों को गुड सेमेरिटन के रूप में पुरस्कृत भी किया जा चुका है। जबकि परिवहन विभाग के सड़क सुरक्षा समिति की ओर से जिले के सभी सीएचसी को 25-25 हजार रुपए उपलब्ध कराया गया था। ताकि दुर्घटना के बाद घायल को अस्पताल लाने वालों को तत्काल पहचान करते हुए उन्हें गुड मेरिट के तहत पुरस्कार दिया जा सके। लेकिन जिले के बगोदर और तिसरी के सीएचसी ने ही इसे लेकर दिलचस्पी दिखाई, जबकि अन्य सीएचसी की ओर से लेकर कोई दिलचस्पी नहीं ​दिखाई गई। जिस वजह से जिले के 11 सीएचसी के पास 25-25 रुपए करके 2 लाख 75 हजार रुपए पड़े है। जबकि देखा जाए, तो हर माह जिले में 10 से 15 लोगों की मौत सड़क हादसे में हो ही जाती है। वहीं 20-25 लोग गंभीर रुप से जख्मी होते हैं। गुड सेमेरिटन का मतलब गुड सेमेरिटन वह व्यक्ति होता है जो सद्भावनापूर्वक, भुगतान या पुरस्कार की अपेक्षा के बिना और देखभाल या विशेष संबंध के किसी भी कर्तव्य के बिना, दुर्घटना या आपातकालीन चिकित्सा िस्थति या आपातकालीन स्थिति में घायल व्यक्ति को तत्काल सहायता या आपातकालीन देखभाल प्रदान करने के लिए स्वेच्छा से आगे आए। गोल्डन ऑवर में उसे अस्पताल पहंुचाने का काम करे। इससे जख्मी की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। सड़क दुर्घटना में जख्मी व्यक्ति को गोल्डन ऑवर (दुर्घटना के पहले एक घंटे) में अस्पताल पहंुचाने वाले व्यक्ति को 2,000 से 5,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। वहीं घायल को अस्पताल पहंुचाने वाले की संख्या एक हुई तो उसे दो हजार, सेमेरिटन की संख्या दो हुई, तो दोनों सेमेरिटन को दो-दो हजार रुपए और तीन होने पर पांच हजार की राशि उनमें बांटे जाने का प्रावधान है। गुड सेमेरिटन पॉलिसी 2020 में लागू की गई है। इस तरह के मामलों में अस्पताल पहुंचाने वाले को पु​लिस परेशान नहीं करेगी। अगर मामला कोर्ट में जाता है, तो गुड सेमेरिटन को कोर्ट आने-जाने के लिए विभाग से वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। गुड मेरिट योजना की जानकारी दी जा रही है: डीटीओ जिला परिवहन पदाधिकारी शैलश कुमार प्रियदर्शी ने कहा कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत गुड मेरिट योजना की जानकारी आम लोगों को दी जा रही है, साथ ही सरकार की इस योजना की जानकारी भी दी जा रही है। ताकि सड़क हादसे में घायल को लेकर आम लोग नजदीक के अस्पताल पहंुचकर उसकी जान बचा सके। हर सीएचसी के पदाधिकारी को भी इसकी पहचान करने को कहा गया है, ताकि लोगों में मदद की भावना बढ़े।

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