शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना सरकारी मॉडल स्कूल भवन निर्माण सिस्टम की लापरवाही के कारण दम तोड़ दिया। 8 साल से अधूरे मॉडल स्कूल प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारों की उदासीनता की कहानी बयां कर रही है। घाटशिला अनुमंडल के बहरागोड़ा, चाकुलिया, धालभूमगढ, घाटशिला तथा डुमरिया में एक साथ भवन का निर्माण शुरू हुआ था पर प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही तथा ठेकादार के उदासीनता के कारण अधूरा ही रह गया। इस मामले को लेकर पहली बार शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने संज्ञान में लिया तथा बहरागोड़ा मॉडल स्कूल के अधूरे भवन को लेकर जांच पड़ताल शुरू करायी है। ठेकादार को विभाग से नोटिस भेजी गयी है तथा ब्लैक लिस्टेड की कार्रवाई शुरू की गयी है। 15 जनवरी को ठेका कंपनी के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में भवन की अंतिम मापी करायी जाएगी। ठेका कंपनी ने 95% से ज्यादा राशि उठाव करने के बाद भी भवन को पूरा नहीं किया। इसी तरह अन्य स्कूलों के अधूरे भवनों पर अधिकारियों ने किसी तरह की पहल नहीं की है। जिम्मेदार अधिकारी इतने सुस्त है कि बिना मंत्री के पहल शुरू किए वे कुछ नहीं करते हैं। जानकारी हो कि करीब तीन – तीन करोड़ की लागत से मॉडल स्कूल भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2015-16 में शुरू हुआ था। 8 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक भवन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इस दौरान केवल फाइलों में कागजी घोड़ा दौड़ता रहा। कार्रवाई शून्य रही। इसमें ना तो किसी ठेकादार पर कोई कार्रवाई हुई तथा ना ही जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए गए। तत्कालीन संबंधित अधिकारी कमीशन लेकर दूसरे जगह ट्रांसफर हो गए उसके बाद से किसी ने इस मामले को नहीं देखा। उक्त खबर को अच्छी हेडिंग दें भवनों की दीवारों पर आ गईं दरारें जानकारी के मुताबिक निर्माणाधीन भवन झाड़ियों से घिर चुका है। भवन की दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। उसके अंदर के उपस्कर चोरी हो चुके है। कुल मिलाकर नवनिर्मित मॉडल स्कूल भवन सरकारी पैसों के दुरुपयोग का का बेहतर नमूना पेश कर रही है। करोड़ों की लागत से बनी यह भवन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। दूसरे स्कूल भवन में चल रहीं कक्षाएं सरकारी मॉडल स्कूल सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत सरकारी स्कूलों से बच्चों का चयन कर मॉडल स्कूलों में नामांकन कराया जाता है। जहां बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाती है। वर्ष 2012 में मॉडल स्कूल का संचालन शुरू हुआ। संसाधनों को विकसित करने का काम भी शुरू हुआ। परंतु तब से लेकर आज तक पुरानी व्यवस्था में ही स्कूल का संचालन हो रहा है। नाम को तो बच्चों की पढ़ाई अंग्रेजी में कराई जा रही है, परंतु सुविधा के नाम पर वर्तमान सरकारी स्कूलों से भी फिसड्डी साबित हो रही है । इसके बावजूद शिक्षकों की कर्तव्यनिष्ठा के कारण पिछले कई वर्षों से मॉडल स्कूल में मैट्रिक की शत प्रतिशत रिजल्ट हो रही है। तीन कमरों में चल रहीं 5 कक्षाएं मॉडल स्कूलों में एक तरफ करोड़ों की राशि खर्च करने के बावजूद विद्यालय भवन अधूरा खड़ा है। दूसरी ओर जिन भवनों में मॉडल स्कूल संचालित हो रहे हैं, वहां बच्चों के बैठने की व्यवस्था भी नहीं है। चाकुलिया स्थित केएनजे हाई स्कूल परिसर में वर्तमान में मॉडल स्कूल संचालित हो रही है। जिनमें महज 3 कमरे हैं और कक्षा 6 से दसवीं तक के पांच कक्षाओं की पढ़ाई कराई जा रही है। एक झलक… मॉडल स्कूल निर्माण किस प्रखंड में भवन अधूरा : घाटशिला, डुमरिया, बहरागोड़ा, चाकुलिया तथा धालभूमगढ़। कब शुरू हुई निर्माण : वर्ष 2015-16 से वर्तमान स्थित : सभी भवन अधूरा। भवन की लागत : तीन करोड़ रूपए। ^बहरागोड़ा मॉडल स्कूल का मैंने बीते दिनों निरीक्षण किया था। पूरी जानकारी लेने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई करने का आदेश दिया था। उक्त आलोक में विभागीय अधिकारियों ने अंतिम मापी के लिए ठेका कंपनी को नोटिस जारी किया है। अन्य प्रखंडों में अधूरे भवन को लेकर भी जल्द कार्रवाई शुरू की जाएगी। -रामदास सोरेन, शिक्षा मंत्री, झारखंड।


