बेबी ब्वॉय पैदा करने लिए प्रमोट करने वाले वीडियो-वेबसाइट बैन:स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत 1 हजार को किया ब्लॉक; राज्यों से कहा, ऐसे वीडियो, साइट्स को आइडेंटिफाइ कर ब्लॉक करवाए

पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के विषय पर आज जयपुर के आरएएस क्लब में एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन हुआ। इसमें बताया कि लोगों में लड़का-लड़की के फर्क को खत्म करने पर सरकार किस स्तर पर प्रयास कर रही है। वर्कशॉप में बताया कि सरकार ने पिछले कुछ समय में ऐसे एक हजार वीडियो, वेबसाइट को ब्लॉक किया है, जो बेबी ब्वॉय पैदा करने के लिए के तरीकों को बताते है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आरसीएच) मीरा श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बुधवार को हुई इस वर्कशॉप में बताया कि सरकार “लडका-लड़की बराबर है, तो पूछना क्यों” स्लोगन पर आधारित अभियान के साथ ही जागरूकता अभियान को और भी प्रभावी तरीके से कर दिया। वर्कशॉप में बताया केंद्र सरकार ने पिछले कुछ समय में ऑनलाइन वेबसाइटस पर बेबी ब्वॉय पैदा करने के लिए उपलब्ध विभिन्न प्रकार के वीडियो या अन्य तरह के कंटेंट देने वाली वेबसाइट्स जिनकी संख्या करीब एक हजार है उनको ब्लॉक किया है। सचिव ने कहा कि अभी भी यह एक बड़ी चुनौती है, जिसका सामना करने के लिए राज्यों को भी पहल करनी चाहिए। राज्य ऐसी वेबसाइट्स, वी​डियो को आईडेंटिफाई करें और सहयोग पोर्टल के माध्यम से ब्लॉक करवाने की कार्रवाई करें। इस मौके पर अध्यक्ष राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी डॉ. अमित यादव, केंद्रीय उपयुक्त पीसीपीएनडीटी डॉक्टर पद्मिनी कश्यप, पीसीपीएनडीटी एवं जेंडर स्पेशलिस्ट इफात हमीद, परियोजना निदेशक पीसीपीएनडीटी राकेश कुमार मीणा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। जिन्होंने इस एक्ट से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया, मॉनिटरिंग, मुख्य चुनौतियां सहित अन्य जानकारियां दी। सोनोग्राफी मशीनों के रजिस्ट्रेशन, रिन्युअल का टाइम फ्रेम तय हो कार्यशाला के दौरान संयुक्त सचिव ने कहा की सोनोग्राफी मशीनों के रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए एक टाइम फ्रेम तैयार किया जाना आवश्यक है। ताकि हर स्तर पर नजर रखी जा सके। उन्होंने बताया- अक्सर कई स्थानों पर सोनोग्राफी मशीनों को बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित किया जा रहा है, जो गैरकानूनी है।

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