भास्कर न्यूज | लुधियाना यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापकों की भर्ती और पदोन्नति के नए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इसके लिए ड्राफ्ट तैयार किया गया है जिस पर 5 फरवरी तक सुझाव दिए जा सकते हैं। नियमों के तहत उच्च शिक्षा संस्थाओं में सहायक प्रोफेसर, सहयोगी प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर भर्ती अब पूरी तरह से मेरिट आधारित होगी। इसके लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा और चयन समिति द्वारा उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों के शैक्षणिक और शोध कार्यों का गहन मूल्यांकन किया जाएगा। अगर किसी उम्मीदवार ने अपनी चार वर्षीय स्नातक या पोस्टग्रेजुएट डिग्री में एक विषय चुना है, लेकिन उनका पीएचडी विषय अलग है, तो उन्हें उस विषय में भर्ती के लिए योग्य माना जाएगा, जिसमें उन्होंने पीएचडी की है। इसके अलावा, उम्मीदवारों को नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट(नेट) में उत्तीर्ण विषय में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए योग्य माना जाएगा। आरक्षित वर्ग (एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी) के उम्मीदवारों को स्नातक और पोस्टग्रेजुएट स्तर पर 5% अंकों की छूट दी जाएगी। वहीं, जो उम्मीदवार 1991 से पहले पोस्टग्रेजुएट डिग्री प्राप्त कर चुके हैं, उन्हें पीएचडी डिग्री रखने के बावजूद 5% अंकों की छूट मिलेगी। रिसर्च पेपर का प्रकाशन मान्यता प्राप्त जर्नल्स में और किताबों का प्रकाशन प्रतिष्ठित प्रकाशकों से होना चाहिए। स्वयं प्रकाशित किताबें या अध्याय मान्य नहीं होंगे। चयन समिति द्वारा बाहरी विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर इन योगदानों का मूल्यांकन किया जाएगा। शैक्षिक क्षेत्र में डिजिटल कंटेंट निर्माण, भारतीय भाषाओं में शिक्षण, और भारतीय ज्ञान प्रणाली में शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए उम्मीदवारों को प्रोत्साहित किया जाएगा। खेलों और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में भी खेलों में विकलांग व्यक्तियों की भागीदारी, स्वास्थ्य और फिटनेस कार्यशालाओं के आयोजन, और भारतीय खेलों को बढ़ावा देने के प्रयासों को महत्व दिया जाएगा। उच्च शिक्षा में नियुक्तियों और पदोन्नति के लिए उम्मीदवारों द्वारा एमफिल और पीएचडी डिग्री प्राप्त करने के समय को शिक्षण या शोध अनुभव के रूप में नहीं माना जाएगा। हालांकि, यदि कोई शिक्षक रिसर्च डिग्री के साथ-साथ शैक्षिक कार्य करता है और उसने कोई अवकाश नहीं लिया है, तो उसे उस अवधि को नियुक्ति या पदोन्नति के लिए अनुभव के रूप में स्वीकार किया जाएगा। वाइस-चांसलर विशेष श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए चयन समिति में एक सदस्य नामित करेंगे। यह सदस्य चयन प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करेंगे कि केंद्रीय और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। जो उम्मीदवार 11 जुलाई, 2009 से पहले पीएचडी में पंजीकृत थे, उन्हें सहायक प्रोफेसर, सहायक लाइब्रेरियन और शारीरिक शिक्षा और खेल निदेशक के पद के लिए नेट, एसएलईटी या सेट की आवश्यकता से छूट मिलेगी। राज्य सरकारों या यूटी के तहत आने वाले कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, सहयोगी प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर भर्ती इन दिशा-निर्देशों या राज्य सरकार के नियमों के अनुसार की जाएगी, बशर्ते न्यूनतम योग्यताएं इन दिशा-निर्देशों में दी गई हों। टीचर्स के लिए करियर उन्नति योजना (सीएएस) के तहत पदोन्नति के भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत, यदि कोई शिक्षक न्यूनतम योग्यताएं पूरी करता है, तो वह किसी भी समय अपने पदोन्नति के लिए आवेदन कर सकता है। टीचर द्वारा विभिन्न प्रकार के अवकाश जैसे मातृत्व अवकाश, अध्ययन अवकाश, चिकित्सा अवकाश आदि की अवधि को भी पदोन्नति के लिए अनुभव के रूप में माना जाएगा, बशर्ते इन छुट्टियों को उचित प्राधिकृत अधिकारियों से पूर्व स्वीकृति प्राप्त हो। शिक्षक साल भर कभी भी पदोन्नति के लिए आवेदन कर सकते हैं, यदि वे सभी आवश्यक योग्यताएँ पूरी करते हैं। डायरेक्ट भर्ती द्वारा नियुक्त शिक्षक की सीनियोरिटी नियुक्ति तिथि के आधार पर तय की जाएगी, जबकि सीएएस के तहत पदोन्नत शिक्षक की सीनियोरिटी पदोन्नति तिथि के आधार पर होगी।


