अमेरिका में कराए 3 करोड़ 72 लाख फ्रीज:इंदौर की कंपनी को स्टेट साइबर सेल ने बड़े फर्जीवाड़े से बचाया

इंदौर की निजी कंपनी शिवगंगा डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड ने स्टेट साइबर सेल में करोड़ों की ठगी को लेकर कुछ दिन पहले शिकायत की थी। मामले में भारतीय साइबर पोर्टल से अमेरिकी साइबर पोर्टल पर संपर्क कर उक्त अमाउंट फ्रीज कराया गया। जिसमें करोड़ रुपए बचाए गए।
टीआई दिनेश वर्मा ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि स्टेट साइबर सेल इंदौर द्वारा भारतीय साइबर पोर्टल पर शिवगंगा डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड ने शिकायत की थी। जिसमें बताया कि अमेरिका के हॉउसटन स्थित उसकी कंपनी के वेंडर, इनोवेक्स इंटरनेशनल इंक को 415,017.58 डॉलर इंडियन करेंसी में लगभग 3.72 करोड़ रुपए इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन के माध्यम से व्यापारिक भुगतान किया जाना था। इसमें साइबर अपराधियों ने बिजनेस ईमेल कंप्रोमाइज (बीईसी) तथा स्पूफिंग ईमेल का उपयोग कर करोड़ों रुपए अंतरराष्ट्रीय फॉरेन रेमिटेंस, अमेरिका की जेपी मॉर्गन बैंक के एक संदिग्ध एकाउंट में धोखाधड़ी से ट्रांसफर करवा ली। साइबर अपराधियों द्वारा एक बार धोखाधड़ी से करोड़ों रुपए ट्रांसफर करवाने के बाद शिवगंगा कंपनी को फिर से स्पूफ ईमेल भेजा और दूसरी बार में बताया कि उनका भुगतान रिजेक्ट हो चुका है। वह एक अल्टरनेट बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए। शिवगंगा कंपनी से री-पेमेंट करने जब मेल आया तो उन्होंने शंका होने पर वेंडर से टेलीफोन से बात की।
बताया गया कि रुपए उनके अंकाउट में नही आए है। कंपनी द्वारा स्टेट साइबर सेल इंदौर में शिकायत पर ऑनलाइन प्रकरण दर्ज करवाया गया। इसके बाद अमेरिका के पोर्टल पर भी शिकायत कर करोड़ों रुपए होल्ड करवाए गए। इसमें अमेरिका से पूरा अमाउंट डॉलर में फिर से इंदौर की कंपनी को दिलाया गया।
ऐसे करते हैं धोखा
टीआई के मुताबिक स्पूफ ईमेल एक प्रकार का धोखाधड़ी वाला ईमेल होता है। उसे भेजने वाला अपना ईमेल डोमेन या नाम जाली तरीके से बदल लेता है। ताकि यह किसी विश्वसनीय स्रोत, जैसे बैंक या कंपनी, से आया हुआ लगे। इसी प्रकार बिजनेस ईमेल कंप्रोमाइज (बीईसी) धोखाधड़ी वाले भुगतान करने के लिए व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाला एक फ्रॉड है। एएसआई को बनाया प्रधान आरक्षक
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने ऑपरेशन क्लीन के चलते तिलक नगर की FRV में ड्यूटी के दौरान रामेश्वर परमार अत्यधिक शराब पीकर सोने की शिकायत के चलते उसे 5 साल के लिए एएसआई से प्रधान आरक्षक बनाया गया। वह ड्यूटी पर सोता हुआ पाए जाने और साथी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार के चलते कार्यवाही की गई हैं।
एएसआई अपनी पूरी नौकरी के दौरान इसी प्रकार शराब पीने का व लोगो के साथ अभद्र व्यवहार का आदि है, जिसके कारण पूर्व में भी दंडित हो चुका है। इसी प्रकार शराब के नशे के आदि व कार्य में लापरवाही करने के चलते पदावनत कर प्रधान आरक्षक बनाने की कार्रवाई की गई है, अब एएसआई अपने रिटायरमेंट अवधि 2029 तक प्रधान आरक्षक ही रहेगा। पुलिस कमिश्नरेट में लगातार अनुशासनहीनता व लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

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