6 साल पहले हाईवे पर निर्वस्त्र मिली थी युवती:गैंगरेप का केस, मुंह पर पाॅलीथिन, शरीर में धंसे थे एलईडी बल्ब और इंजेक्शन, पार्ट-1

6 साल पुराना केस। जयपुर-आगरा हाईवे की सर्विस लेन पर देर रात 26 साल की युवती बेहोश मिली। शरीर पर कपड़े नहीं थे। जगह-जगह चोट के निशान। प्राइवेट पार्ट में बल्ब और सिरिंज थे। मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसके ऊपर टेप लगी थी। नाक में भी सिरिंज घुसाई हुई थी। चेहरे को पॉलीथिन से ढककर रस्सी से बांध रखा था, जिसमें सांस ले पाना भी मुश्किल था। होश में आते ही युवती ने पुलिस को बताया- मेरा गैंगरेप कर दरिंदों ने मुझे यहां फेंका है। पुलिसकर्मियों ने तुरंत इसकी सूचना आला अधिकारियों को दी। महकमे में हड़कंप मच गया। थाना इंचार्ज से लेकर डीसीपी तक सभी के फोन एक के बाद एक घनघना उठे। राजस्थान क्राइम फाइल में इस बार पढ़िए 6 साल पुरानी दिल दहला देने वाली घटना… 22 मई 2019, रात के ढाई बजे। जयपुर-आगरा हाईवे पर एक युवती शनि मंदिर के नजदीक पोल्ट्री फार्म के पास निर्वस्त्र पड़ी मिली। वह बेहोश थी। उसी इलाके रहने वाले लोकेश कुमार रावत ने पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी। कानोता पुलिस मौके पर पहुंची तो युवती सर्विस लाइन पर खड़ी थी। शरीर पर जगह–जगह खरोंच और रगड़ने के निशान थे। मुंह पर काला पदार्थ लगा हुआ था। मौके पर पहुंची महिला पुलिसकर्मियों ने उसके शरीर को जीप में पड़े एक कपड़े से ढका। उसे तुरंत एंबुलेंस से एसएमएस हॉस्पिटल लेकर गए। युवती की गंभीर हालत देखकर डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ भी सकते में आ गए। हॉस्पिटल के ट्रॉमा वार्ड में युवती के प्राइवेट पाट़्‌र्स से एलईडी बल्ब, सिरिंज और प्लास्टिक की रस्सी का टुकड़ा निकाला गया। इन्हें पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। सूचना मिलने पर तत्कालीन डीसीपी ईस्ट राहुल जैन व एडिशनल डीसीपी ललित किशोर शर्मा भी एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचे। पुलिस को दिए पर्चा बयान में युवती ने जो घटना बताई, वह सुनकर रौंगटे खड़े हो गए मैं लालकोठी इलाके में विधानसभा के पास एक गर्ल्स हॉस्टल में किराए पर रहती हूं। प्राइवेट कंपनी में काम करती हूं। फरवरी 2019 में में एक युवक से मिली थी, जो खुद को मानवाधिकार आयोग में बताता था। एक केस में मदद करने का झांसा देकर युवक ने मुझसे 45 हजार रुपए ले लिए। जब मुझे पता चला कि युवक झूठ बोल रहा है तो उससे रुपए वापस मांगे। युवक ने रुपए लौटाने के बजाय मेरा मोबाइल नंबर ही ब्लॉक कर दिया। इस कारण मैं रुपए लेने रात को करीब 9 बजे आगरा रोड पर मंगल विहार में उसके घर गई थी। मैं युवक के परिवार वालों को रिकॉडिंग सुना रही थी। उसी दौरान किसी ने पीछे से सिर पर भारी चीज से हमला किया। इसके बाद मैं बेहोश हाे गई। बेहोश होने तक टॉर्चर और फिर जंगल में फेंका
जब मुझे होश आया तो मैं एक कमरे में थी। वहां तीन लोग मौजूद थे। वो मुझे सिगरेट से दाग रहे थे। प्राइवेट पाट्‌र्स में एलईडी बल्ब और इंजेक्शन सिरिंज डाल दी। तीनों ने मेरे साथ बुरी तरह मारपीट की। नुकीली चीज से छाती व कमर पर वार किया। ये टॉर्चर तब तक चला, जब तक मैं बेहोश नहीं हो गई। इसके बाद जब दोबारा होश आया तो मैं जंगल में पड़ी थी। शरीर पर कपड़े नहीं थे। अंडरगारमेंट्स से पांव बंधे हुए थे। किसी तरह कांटों की मदद से मैंने सिर पर बांधी हुई पॉलीथिन को हटाया। सरकते हुए सड़क के नजदीक पहुंची। कई राहगीरों से मदद मांगी लेकिन किसी ने भी गाड़ी नहीं रोकी। करीब डेढ़ घंटे के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में जुटी पुलिस, कैब ड्राइवर के भी हुए बयान
पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से जांच में जुट गई। पुलिस की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची और छानबीन शुरू की। घटनास्थल के पास ही एक पुरानी इस्तेमाल की गई चादर, कुछ कपड़े व अन्य सामान बरामद हुए। पुलिस ने वारदात के समय आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाना शुरू किया। नामजद तीनों आरोपियों को डिटेन कर उनसे सख्ती से पूछताछ शुरू हुई। पुलिस ने उस ओला बाइक राइडर से भी पूछताछ की जो युवती को मंगल विहार इलाके में लेकर आया था। इसके साथ ही उबर कैब ड्राइवर के भी बयान दर्ज किए गए। यह ड्राइवर युवती को 3 अन्य साथियों के साथ इस घटना से दो दिन पहले 19 फरवरी को युवक के घर लाया था। पुलिस कॉन्स्टेबल सहित पांच पर आरोप, मोबाइल भी छीना
युवती ने अपने बयान में जयपुर पुलिस के कॉन्स्टेबल सहित 3 युवकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। 2 अन्य युवकों के बारे में भी बताया, जो इस साजिश में शामिल थे। युवती ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उसका मोबाइल भी छीन लिया। कानोता थाना पुलिस ने गैंगरेप (376–डी ), अननेचुरल सेक्स ( 377), हत्या का प्रयास ( 307), मारपीट सहित अन्य धाराओं (323, 341 व 354) में केस दर्ज किया। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से युवती की जांच कराई। धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज कराए। मामले की जांच बस्सी की तत्कालीन एसीपी मनस्वी चौधरी को सौंपी गई। उन्होंने सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले तत्कालीन कानोता थाना इंचार्ज नरेंद्र खींची, एसआई रामधन, हेड कॉन्स्टेबल बृजलाल और थाने के सिपाहियों के बयान दर्ज किए। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले
पुलिस ने संदिग्धों की पहचान के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगालना शुरू किया।स्थानीय लोगों से पूछताछ कर महत्वपूर्ण सुराग जुटाए। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की लोकेशन के आधार पर कुछ सीसीटीवी फुटेज भी मिले। पुलिस के सामने जल्द से जल्द केस सॉल्व करने की चुनौती थी। घटना को लेकर लोगों में जबरदस्त आक्रोश था। कल पार्ट–2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब …

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