माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं साइंस की 13 विद्यार्थियों की कॉपियों को जांचा ही नहीं और सीधे मेन पेज पर योग में अंक दे दिए गए। बोर्ड ने जांच में ऐसा पाया है । बोर्ड के जवाब के आधार पर स्कूल शिक्षा अजमेर के संयुक्त निदेशक साहेब सिंह ने परीक्षक वरिष्ठ अध्यापक विज्ञान निमिषा रानी
को नियम 16 के तहत चार्जशीट थमाई है। केंद्रीय मूल्यांकन केंद्र अजमेर पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा परीक्षक क्रमांक 53086 के अंतर्गत निमिषा रानी को मूल्यांकन कार्य के लिए नियुक्त कर उत्तर पुस्तिकाएं आवंटित की गई थी। इसी केंद्र में ही परीक्षक के ऊपर भी अधिकारी होते है जो इनके काम को बारीकी से देखते है। सही कॉपी जांचने की सूरत में ही परीक्षक को और कॉपियां दी जाती है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि जब परीक्षक ने बिना कॉपियां जांचें ही अपने मन से ही सीधे मुख्य पृष्ठ पर अंक दे दिए तो उनका ध्यान क्यों नहीं गया? बोर्ड ने ऐसे अफसरों को डिबार क्यों नहीं किया ? शिक्षा विभाग ने इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की? 10 वीं बोर्ड साइंस की कॉपी जांची ही नहीं और दे दिए मनमाफिक नंबर, शीर्षक से दैनिक भास्कर ने इस मामले का खुलासा करते हुए बारां शहर के परीक्षार्थियों की बिना जांची तीन कॉपियों के उदाहरण भी दिए थे। भास्कर में प्रकाशित खबर पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर परीक्षक को निलंबित कर उन्हें जिला बदर करते हुए मुख्यालय भेरूंदा, नागौर कर दिया था। बोर्ड ने उन्हें 5 साल के लिए के लिए कॉपियां जांचने के लिए डिबार करते हुए उनका आधा पारिश्रमिक काट लिया था। बोर्ड के 67 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि परीक्षार्थियों की कॉपियां ही नहीं जांची गई हो और सीधे ही नंबर दे दिए गए हो। बोर्ड ने गंभीरता दिखाते हुए तत्काल तीनों मामलों की कॉपियां चैक करवाई तो उनके होश उड़ गए, एक भी सवाल जचां हुआ नहीं था। जैसी कॉपियां छात्रों ने लिखी वैसी ही पाई गई। बिना जंची पाए जाने पर परीक्षक निमिषा रानी को बुलाया गया। तब उन्होंने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि काम की अधिकता व मानसिक तनाव से ऐसा हुआ, इसके लिए खेद है। भविष्य में ऐसा नहीं होगा। स्कूल शिक्षा अजमेर के संयुक्त निदेशक ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड प्रशासन से इस मामले में वस्तु स्थिति से अवगत कराने को कहा था। बोर्ड ने उन्हें जांच-पड़ताल कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया था। बोर्ड ने सभी 13 प्रमाणित कॉपी शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक को भिजवा दी है। यह कॉपियां पूरी तरह से खाली है। एक भी सवाल जचां हुआ नहीं है। जबकि निमिषा का कहना था कि सभी कॉपियां जांची और सभी सवालों पर नंबर भी दिए हैं।
4 प्रकरण में अंक बढ़े, 7 में पहले से कम, 2 में समान अंक
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 4 प्रकरणों में अंक वृद्धि हुई व 7 प्रकरणों में पूर्व प्रदत्त अंक से कम प्रदान किए जाने से परीक्षार्थियों के अंकों में कमी नहीं की जाकर अंक यथावत रखे गए। 2 प्रकरणों में समान अंक प्रदान किए जाने से अंक यथावत रहे। जिसके कारण माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा। उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं कर केवल योग में अंक प्रदान कराना मूल्यांकन कार्य में घोर लापरवाही एवं गंभीर अनियमितता का द्योतक है। जिसके कारण परीक्षार्थियों व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को अनावश्यक रूप से यह परेशानी हुई। नंबर कम आने की आपत्ति 13 ने ही की
सूत्रों के मुताबिक 10वीं साइंस में कम अंक आने की आपत्ति की सिर्फ 13 छात्र-छात्राओं ने ही की। यही वजह रही कि इनके आवेदन पर बोर्ड ने कॉपियां इनको भिजवा दी थी। यह कॉपियां उनके पास सुरक्षित थी। इस कारण इन 13 कॉपियों में किसी तरह का फेरबदल नहीं किया जा सकता। इनमें से 3 ने दोबारा से कम अंक आने पर आपत्ति थी। सूत्र बताते हैं कि परीक्षक द्वारा जिन कॉपियों के मुख्य पृष्ठ पर कुल योग जो नंबर थे वहीं बाद में कॉपियों को जंचवाकर सवालों में अंक दे दिए गए।
राजनैतिक या अन्य प्रभाव काम में नहीं लेंगे
आरोप पत्र में अनुशासनिक प्राधिकारी एवं संयुक्त निदेशक ने लिखा, एक राजकीय कर्मचारी होने के नाते आपको चाहिए था कि आप बोर्ड उत्तर पुस्तिकाओं को जिम्मेदारी से जांच कर अंक प्रदान करते परंतु आप द्वारा ऐसा नहीं किया गया। एक लोक सेवक होने के नाते आपसे सत्यनिष्ठा, कर्त्तव्यनिष्ठा से कार्य करने की अपेक्षा की जाती है परंतु आप द्वारा ऐसा नहीं किया गया। अनुशासनिक प्राधिकारी ने वरिष्ठ अध्यापक निमिषा रानी को राजस्थान सिविल सेवाएं आचरण नियम 1971 के नियम 24 के प्रावधानों की और भी ध्यान दिलाया। इसमें यह उल्लेख है कि कोई सरकारी कर्मचारी सरकार के अधीन अपने हित को बढ़ावा देने के लिए किसी उच्च प्राधिकारी पर दबाव डालने के लिए कोई राजनैतिक या अन्य प्रभाव नहीं लाएगा। न ही ऐसी कोई कोशिश करेगा। रिपोर्ट-सुरेश कासलीवाल, अजमेर


