कोरबा जिला जेल का प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष शर्मा की अध्यक्षता में सघन निरीक्षण किया गया। इस दौरान बंदियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न सुविधाओं का जायजा लिया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल में बंद कैदियों की स्थिति, उन्हें मिल रही मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना था। जेल की रसोई, स्वास्थ्य केंद्र और स्वच्छता व्यवस्था का लिया जायजा निरीक्षण के दौरान बोर्ड सदस्यों ने जेल परिसर के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से अवलोकन किया। इसमें कैदियों के बैरक, रसोईघर, स्वास्थ्य केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था और अन्य सामान्य उपयोग के स्थान शामिल थे। अधिकारियों ने कैदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और दैनिक दिनचर्या की जानकारी ली। जेल में भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सुविधाओं का निरीक्षण किया भोजन की गुणवत्ता, पोषण मानकों, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, दवाइयों और चिकित्सकों की उपस्थिति, और शिक्षा कार्यक्रमों जैसी गतिविधियों का भी आकलन किया गया। जेल लीगल एड क्लीनिक की कार्यप्रणाली की भी जांच की गई, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कैदियों को समय पर और सरल कानूनी सहायता मिल रही है। प्रधान जिला न्यायाधीश संतोष शर्मा ने जेल अधीक्षक को स्वच्छ वातावरण, पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं बिना किसी बाधा के सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के समय जेल में 17 महिला और 189 पुरुष बंदी मौजूद थे। इस संयुक्त निरीक्षण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयुरा गुप्ता, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कु. त्राप्ति कु. ग्रेसी, अपर कलेक्टर कोरबा ओमप्रकाश यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतिश सिंह ठाकुर, लोक निर्माण विभाग से विजय लक्ष्मी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सी.के. सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी तामेश्वर उपाध्याय, रोजगार अधिकारी दिपेश भारती, उद्योग अधिकारी विनय कुमार, वेलफेयर अधिकारी मुकेश कुमार और समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक हरीश सक्सेना भी उपस्थित थे।


